तथा टेक्स्ट टू स्पीच तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
पाठ्यक्रम के अंतर्गत हिन्दी साहित्य के डिजिटलीकरण,
ए आई आधारित लेखन उपकरणों, चैटबॉट तकनीक, डिजिटल पुस्तकालय, सोशल मीडिया और डिजिटल
हिन्दी जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त मशीन अनुवाद, ए आई, आधारित
संपादन, मीडिया एवं शोध कार्य में ए आई की उपयोगिता पर भी विशेष अध्ययन करवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल युग की आवश्यकताओं
के अनुरूप तैयार करेगा तथा हिन्दी भाषा को तकनीकी रूप से अधिक सशक्त बनाने में सहायक
सिद्ध होगा। पाठ्यक्रम में ए आई के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों पर भी गंभीर
चर्चा की जाएगी, जिससे विद्यार्थी तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों को
समझ सकेंगे। उन्होंने बताया कि इन दिनों एमए हिंदी में प्रवेश
पाने के लिए ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक विद्यार्थी ऑनलाइन प्रक्रिया
के माध्यम से गुजविप्रौवि की वेबसाइट पर दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं।