नई दिल्ली, 21 अप्रैल । उच्चतम न्यायालय ने 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित नाबालिग के साथ हुए गैंगरेप और हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता के परिवार को उप्र से दिल्ली ट्रांसफर करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस मामले की मानिटरिंग इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर रही है। ऐसे में याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के नियम 15 के तहत परिवार को सुरक्षा मिलनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के आधार पर परिवार को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है तो हम यहां सुनवाई कैसे करें।
सुनवाई के दौरान उप्र सरकार ने कहा कि राज्य सरकार ने पीड़िता के परिवार को उप्र के अंदर ही दूसरे स्थान जैसे अलीगढ़ या कासगंज में भेजने का ऑफर दिया था। उप्र सरकार ने कहा कि इस मसले पर उच्च न्यायालय में मामला अभी लंबित है और उच्च न्यायालय राज्य सरकार के रुख पर एतराज जता चुकी है। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में समानांतर कार्यवाही नहीं चल सकती है।
14 सितंबर 2020 को हाथरस में पीड़िता के साथ गैंगरेप हुआ। उसके साथ मारपीट कर रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई। आरोपितों ने पीड़िता को अधमरी हालत में रोड पर छोड़ दिया। पीड़िता को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया। उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया, जहां 29 सितंबर 2020 को उसने दम तोड़ दिया।