शिमला, 10 अप्रैल । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्यसभा चुनाव से जुड़े मामले में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन को बड़ी राहत दी है। अदालत ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें हर्ष महाजन की ओर से पेश की गई गवाहों की सूची पर आपत्ति जताते हुए कुछ गवाहों को हटाने की मांग की गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव याचिका की सुनवाई एक तरह की ट्रायल प्रक्रिया होती है, जिसमें साक्ष्य और गवाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए गवाहों को गैरजरूरी बताकर हटाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि हर्ष महाजन की ओर से पेश की गई गवाहों की सूची प्रक्रिया के अनुसार सही और वैध है।
हर्ष महाजन की ओर से उनके अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि चुनाव याचिका जैसे मामलों में गवाहों की भूमिका जरूरी होती है। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि कुछ गवाहों को बुलाने से मामले की सुनवाई लंबी हो सकती है और उनकी गवाही में तथ्यों की पुनरावृत्ति होगी। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और आवेदन खारिज कर दिया। विक्रांत ठाकुर ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव संबंधी मामलों में गवाहों की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता।
वहीं, फैसले के बाद हर्ष महाजन ने कहा कि अदालत का यह निर्णय निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में महत्वपूर्ण है और सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी ओर से पेश किए गए गवाह मामले के तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद करेंगे। वहीं भाजपा ने इस फैसले को कानूनी रूप से महत्वपूर्ण राहत बताया है।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए 27 फरवरी 2024 को चुनाव हुआ था। इस चुनाव में सभी 68 विधायकों ने मतदान किया था। विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन चुनाव जीत गए थे। चुनाव के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जबकि तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा उम्मीदवार का समर्थन किया था।
मतदान के बाद दोनों उम्मीदवारों को 34–34 वोट मिले थे। ऐसे में चुनाव आयोग ने नियमों के अनुसार “ड्रॉ ऑफ लॉट्स” की प्रक्रिया अपनाई। इस प्रक्रिया में पर्ची के माध्यम से निर्णय किया जाता है। पर्ची में कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी का नाम आने के कारण उन्हें पराजित घोषित किया गया और हर्ष महाजन विजयी घोषित हुए।
इसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों को लेकर दायर उनकी अर्जी पर अदालत ने मार्च में फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जारी रहेगी।