बेहतर इलाज के लिए पारुल और डोनर आयुष लखनऊ रेफर, किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में कार्रवाई तेज

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कानपुर, 02 अप्रैल । कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले से जुड़े मरीज पारुल और डोनर डॉलर आयुष को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार के लिए गुरुवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर कर दिया गया है। यह फैसला कानपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संसाधनों की कमी और मामले की गंभीरता व संवेदनशीलता को देखते हुए लिया है। दोनों की हालत पर विशेषज्ञ टीम की निगरानी जरूरी समझी गई, जिसके चलते उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा वाले संस्थान भेजा गया है।गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.संजय काला ने बताया कि रोगी पारुल की किडनी ने धीरे-धीरे काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि किडनी प्रत्यारोपण के रोगी के लिए पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से बुधवार देर रात मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी को पत्र लिखकर किडनी डोनर आयुष चौधरी और रोगी पारुल को लखनऊ रेफर करने को कहा गया था। अधिकारियों द्वारा मंजूरी मिलने पर आज उन्हें दो डॉक्टरों की टीम के साथ एम्बुलेंस के जरिये लखनऊ भेज दिया गया। जहां उनका इलाज लोहिया के नेफ्रोलॉजी विभाग में किया जाएगा।

गाैैरतलब है कि किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह में अभी तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अभी डॉ. वैभव, डॉ. अफजल, डॉ. रोहित और डॉ. अनुराग फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीम मेरठ रवाना हो चुकी हैं,क्योंकि डॉ. अफजल मेरठ में अल्फा अस्पताल का संचालक है वहीं डॉक्टर वैभव और अनुराग उर्फ अमित भी मेरठ में ही रहते हैं।स्वास्थ्य विभाग की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। इन अस्पतालों को तीन दिन के अंदर अपना सारा सामान हटाना होगा। इससे पहले मेड लाइफ हॉस्पिटल को सील किया जा चुका था। सूत्रों की मानें तो अभी कई अस्पताल और डॉक्टर पुलिस के रडार पर हैं।

पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि फरार चल रहे आरोपितों के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है, जिसके तहत वह देश छोड़कर नहीं भाग सकेंगे।