नई दिल्ली, 15 मार्च । दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से बरी करने के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दाखिल याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से दूसरे जज को ट्रांसफर करने की मांग करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने केजरीवाल की अर्जी नामंजूर करते हुए सीबीआई और ईडी की ओर से दाखिल याचिकाओं को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के समक्ष ही लिस्ट करने का आदेश दिया। इस मामले पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच 16 मार्च को सुनवाई करने वाली है।
उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने कहा है कि वर्तमान में जो रोस्टर है उसी के मुताबिक ये मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के समक्ष लिस्ट किया गया है। अगर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा खुद सुनवाई से हटती हैं तो उस पर विचार किया जाएगा। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से दूसरे बेंच के पास ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
11 मार्च को केजरीवाल ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मांग की थी कि सीबीआई और ईडी की याचिकाओं को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट से दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि अगर इस मामले पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच सुनवाई करती है तो उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।
केजरीवाल ने पत्र में कहा था कि 9 मार्च को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने बिना उनका पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया था और ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं बताई गयी थी। पत्र में कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप मुक्त करने के आदेश पर रोक असाधारण परिस्थितियों में ही लिया जाता है लेकिन 9 मार्च के आदेश में ऐसा कुछ नहीं बताया गया है कि वे असाधारण परिस्थितियां क्या थीं।
केजरीवाल ने कहा था कि सीबीआई की ओर से दायर याचिका में ईडी के मामले में भी आदेश पारित कर दिया गया जबकि उसमें ईडी पक्षकार भी नहीं था। केजरीवाल ने कहा था कि आमतौर पर इस तरह की याचिकाओं में जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम चार से पांच हफ्ते का समय दिया जाता है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने 9 मार्च को केजरीवाल समेत 23 आरोपितों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपितों को नोटिस जारी किया था। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सीबीआई पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी।