तीन युवाओं की यात्राएं: पर्यावरण, आस्था और पिता की तलाश का दे रहे संदेश

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पूर्णिया, 11 मार्च । देश के अलग-अलग हिस्सों से निकले तीन युवा अपने-अपने अनोखे उद्देश्य को लेकर लंबी यात्राओं पर हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश दे रहा है, कोई देश के सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की यात्रा पर है, तो कोई अपने वर्षों पहले लापता हुए पिता की तलाश में देशभर की सड़कों पर स्केटिंग करते हुए घूम रहा है। इन तीनों युवाओं की यात्राएं लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं।

आज पूर्णिया साइकलिंग एसोसिएशन एवं श्री राम सेवा संघ के सदस्यों द्वारा इन लोगों को पूर्णिया शहर भ्रमण करवाया गया तथा इन्हें सम्मानित किया गया तथा आर्थिक मदद कर गयी । पूर्णिया साइकलिंग एसोसिएशन एवं श्रीराम सेवा संघ के सदस्य राणा प्रताप सिंह ने कहा कि इनसे हम सभी युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए हम लोग इनके सुगम यात्रा की कामना करते हैं।

असम के रहने वाले युवा रूपम गगोई साइकिल से पर्यावरण सुरक्षा और हरियाली का संदेश लेकर यात्रा पर निकले हैं। वे भारत से श्रीलंका तक लगभग 7000 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उनकी इस यात्रा को 15 दिन हो चुके हैं। छोटे किसान परिवार से आने वाले रूपम अपनी इस हिम्मत और प्रेरणा का श्रेय अपनी मां को देते हैं। उनकी मां घर पर अकेली हैं, लेकिन बेटे के इस साहसिक और जनजागरण अभियान के लिए आशीर्वाद दे रही हैं।

वहीं दूसरे युवा महादेव ब्रह्म पूरे भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर निकले हैं। उनका उद्देश्य देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर दर्शन करना और साथ ही लोगों को पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधे लगाने तथा उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही वे लोगों से भारत के विभिन्न क्षेत्रों को जानने और समझने की अपील कर रहे हैं। महादेव ब्रह्म यह यात्रा बंगाल के मशहूर गायक जुबिन दा के सम्मान में भी कर रहे हैं।

तीसरे युवा जगरनाथ राय, जो पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के निवासी हैं, अपने लापता पिता की तलाश में अनोखी यात्रा पर निकले हैं। उनके पिता वर्ष 2009 में लापता हो गए थे और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। जगरनाथ अपने पिता की तस्वीर साथ लेकर सिंगल व्हील स्केटिंग करते हुए देश के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख शहरों तक जा रहे हैं। वे हर जगह सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता की तस्वीर साझा कर रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि शायद किसी दिन उनके पिता मिल जाएं।