धर्मशाला, 11 मार्च । चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने अपने उद्यानिकी एवं कृषि वानिकी विभाग के माध्यम से लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति घाटी के विभिन्न गांवों में सेब की खेती पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की ट्राइबल सब प्लान परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्पीति घाटी के चार गांवों लरी, लियो, ग्यू और पोह के किसानों ने भाग लिया, जहां लगभग 200 किसानों को सेब की वैज्ञानिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सेब की प्रमुख उन्नत किस्मों, पौधों के प्रशिक्षण एवं छंटाई (ट्रेनिंग और प्रूनिंग) की तकनीकों तथा सेब उत्पादन की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए स्पीति घाटी में सेब की खेती की भविष्य की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
उधर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार पांडा ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों, विशेषकर स्पीति घाटी के किसानों तक आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री तथा वैज्ञानिक बागवानी प्रबंधन अपनाने से सेब उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि वैज्ञानिक तकनीकों और प्रमाणित पौध सामग्री के उपयोग से सेब उत्पादन में वृद्धि संभव है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। प्रत्यक्ष लाभ योजना के अंतर्गत किसानों को सेब के पौधे तथा पशुओं (गाय-भेड़ आदि) के लिए मिनरल मिक्सचर भी वितरित किए गए।
परियोजना अन्वेषक-सह-प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एन.डी. नेगी ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेब की उन्नत तकनीकों को अपनाकर किसानों की आय में वृद्धि करना तथा जनजातीय क्षेत्रों में बागवानी विकास को प्रोत्साहित करना है।