बलरामपुर : सरस्वती साइकिल योजना और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ से सशक्त हो रहीं बेटियां

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बलरामपुर, 11 मार्च ।छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न योजनाओं का सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। शासन की दूरदर्शी नीतियों, जनजागरूकता अभियानों तथा सतत मॉनिटरिंग के कारण बालिका शिक्षा का प्रतिशत निरंतर बढ़ रहा है।

पूर्व में ग्रामीण अंचलों में कभी बेटियों की पढ़ाई प्राथमिक कक्षाओं तक सीमित रह जाती थी लेकिन आज बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही हैं।

बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सरस्वती साइकिल योजना जैसे योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं को आर्थिक सहायता और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं साथ ही सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण भी प्रदान किया जा रहा है।

सरस्वती साइकिल योजना से पढ़ाई में दूरी नहीं बनी बाधा

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय की दूरी बालिकाओं की शिक्षा में एक बड़ी चुनौती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए संचालित सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत हाई स्कूल में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को निःशुल्क साइकिल प्रदान की जाती है। इससे छात्राओं की नियमित उपस्थिति बढ़ी है तथा ड्रॉपआउट दर में कमी आई है। शासकीय हाई स्कूल कोठली की छात्रा कुमारी पूनम गुप्ता ने बताया कि साइकिल मिलने से अब पैदल नहीं चलना पड़ता। वह समय पर विद्यालय पहुँचती है और पढ़ाई के लिए अधिक समय दे पाती है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने समाज में सकारात्मक सोच विकसित की है। अभिभावक अब बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्राम स्तर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों, रैलियों और विशेष शिविरों के माध्यम से बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव और स्कूल छोड़ने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा रहा है। स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बालिकाओं को छात्रवृत्ति एवं निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें भी प्रदान की जा रही हैं।

साथ ही मध्यान्ह भोजन एवं पोषण कार्यक्रमों से बालिकाओं का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है। डिजिटल शिक्षा से नई दिशा डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इससे बालिकाएँ तकनीकी रूप से सक्षम बन रही हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार हो रही हैं।

जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण, शिक्षकों की बैठक तथा पालक-शिक्षक बैठक की सक्रियता सुनिश्चित की जा रही है। संबंधित अधिकारियों द्वारा लगातार समीक्षा भी किया जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ पात्र बालिकाओं तक समयबद्ध रूप से पहुंच रहा है।

उल्लेखनीय है कि शासन के सतत प्रयासों से आज बेटियां आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं।