खूंटी, 01 मार्च । तोरपा के बांदू गांव में रविवार को दूसरा शाखा स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। डाॅ सीताराम मुंडा, राजू पाहन सरोज तोपनो, रेशमा मिंजूर, रोवा भेंगरा व सुष्मिता गुड़िया की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिंगबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर बगरय मुंडा ने कहा कि सरना विश्व का सबसे पुराना धर्म है, जो प्रकृति आधारित है. अब सरना धर्म कोड के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जोरदार आंदोलन किया जा रहा है, ताकि हर हालत में सरना धर्म कोड जनगणना परिपत्र में आवंटित हो। उन्होंने कहा कि आजाद भारत में जनजाति समाज के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मसले को अनदेखा किया जा रहा है जिससे भारत में प्रकृति पूजक को धार्मिक गुलामी और धर्मांतरण के लिए मजबूर हो रहे हैं।
धर्मान्तरण रोकने के लिए भारत सरकार को सरना धर्म कोड यथाशीघ्र लागू करना चाहिए। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि सरकार ने प्रकृति महापर्व सरहुल के लिए आगामी 21 मार्च, दिन-शनिवार को सरकारी अवकाश घोषित किया है। सरहुल के लिए अपने घरों, पूजा स्थलों एवं गाड़ियों में नया सरना झंडा लगाया जाएगा और उसी दिन अपने-अपने क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ सरहुल मनाया जाएगा और दोपहर को गाजा-बाजा के साथ सरहुल शोभायात्रा निकाली जाएगी।
समाज में पुराने मन-मुटाव, आपसी भेद-भाव, ईर्ष्या-द्वेष, नाकारात्मक विचारों को त्याग कर नए फूल और पत्तों की तरह समाज में अच्छाई-सच्चाई, सुख, शांति, खुशहाली, दया, क्षमा, प्रेम एवं भाईचारा का संचार करना है।
कार्यक्रम में धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया, मथुरा कंडीर, मुखिया बिमला डोडराय, बाजु मुंडा, रतिया मुंडा, जयपाल हेंबरोम, जीतु पहान, बिरसा तोपनो, जगदेव मुंडा सहित अन्य ने विचार व्यक्त किए। इस समारोह में खूंटी, मुरहू, बंदगांव, अड़की, तोरपा, तपकारा, गुमला तथा आस-पास के गांवों के सरना धर्मावलंबी शामिल हुए।