गुरुग्राम: शिक्षा, चिकित्सा की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें सरकारें: कौशिक जी महाराज

Share

गुरुग्राम, 18 फरवरी । सरकारें वोट बैंक की स्कीमों को छोडक़र शिक्षा और चिकित्सा की गुणवत्ता पर ध्यान दें। सरकारी स्कूलों, अस्पतालों में इसकी गुणवत्ता की बहुत कमी है। बाहर इन दोनों के नाम पर लूट मची है, जिस पर नियंत्रण लगाया जाना चाहिए। हमारे देश में शराब, मांस की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जिसे देखकर कष्ट होता है। इस पर भी रोक लगनी चाहिए। यह हमारी संस्कृति नहीं है। आज कैंसर, किडनी, लीवर फेल होने के केस बढ़ रहे हैं, जो हमारे खराब खानपान की वजह से है। इसमें सुधार होना चाहिए।

यह वक्तव्य गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने दिये। वे बुधवार को यहां ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिव महापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के सातवें दिन प्रवचन दे रहे थे। प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि श्री कौशिक जी महाराज ने मंगलवार को श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के सातवें दिन महाराज जी ने उन मुद्दों पर अपनी बात रखी, जो देश के अंतिम व्यक्ति के हित से जुड़े हैं। श्री कौशिक जी महाराज ने खराब खानपान का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 100 साल में कैंसर की बीमारी इतनी नहीं फैली, जितनी पिछले 10 साल में फैली है। कैंसर इंसानियत के लिए श्राप बन गया है। लाखों लोग हर साल मर रहे हैं। किडनी, लीवर फेल हो रहे हैं।

अगली पीढिय़ों को बेहतर बनाने के लिए पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि बच्चों में ब्रह्चर्य को संभालें। ब्रह्चर्य के चार चरण होते हैं। जिनका पहला चरण ठीक होगा वही देश का भविष्य बन पाएगा। उन्होंने कहा कि भले ही अपने बच्चों को दूर पढ़ाने भेजें। उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर बनाएं, नेता बनाएं। इन सबसे पहले उसे इंसान बनाएं। क्योंकि आज इंसानियत तार-तार हो रही है। उन्होंने कहा कि मांस का जितनी निर्यात आज हो रहा है, वह पहले कभी नहीं हुआ। शराब 10 साल में खूब बढ़ी है। पॉलिसी बेढंगी है। हम भारतीय हैं इसलिये यह सब देखकर कष्ट होता है। सरकारों को संदेश में उन्होंने कहा कि अगर तुम्हारे अधिकार में गाय कटेगी तो बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगीं। संस्कृति खराब हो रही है। बच्चों को बचा लो। तुम सब चाहेगे तभी हो पाएगा। पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति के एक तरफ कुबेर का भंडार और एक तरफ माता-पिता हों तो उसे माता-पिता का चुनाव करना चाहिए। फायदे में वही रहेगा जो कुबेर की जगह माता-पिता को लेगा। शिव महापुराण में भी इसका जिक्र है। माता-पिता से बड़ा कोई न तो कोई था और ना ही होगा। पूज्य महाराज जी ने वानप्रस्थ जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिम्मेदारियों से मुक्त होकर यह जीवन जिया जाए। वानप्रस्थ जीवन भजन के लिए है। जीवनभर टेंशन लेते हैं।