वनभुजनी पूजा परंपरागत तरीके से सम्पन्न

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पूजा से पूर्व पाहन और पनभरवा की ओर से पूरे मोहल्ले की स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति की कामना करते हुए समाज के अखाड़े में विशेष पूजा की गई। परंपरा के अनुसार मोहल्ले की सफाई की गई और सभी घरों में मांस-मछली पकाने की मनाही रही। शाम में सभी परिवारों ने घर के बाहर आंगन में भोजन तैयार किया।

पूजा के बाद छोटे-बड़े सभी पुरुष पारंपरिक धोती पहनकर हाथ में डंडा लिए पूरे मोहल्ले में भ्रमण करते हुए प्रत्येक घर के बाहर रखी एक-एक हांडी को फोड़ते गए। इसके बाद सभी युवक श्मशान स्थित काली मंदिर पहुंचे, स्नान किया और नए कपड़े पहनकर वापस लौटे।

परंपरा के अनुसार गुरुवार की सुबह महिलाएं और बच्चियां टूटे हुए हांडी के टुकड़ों को उठाकर श्मशान काली मंदिर के एकांत स्थान या मोहल्ले की सीमा के बाहर फेंकेंगी। इसके बाद स्नान कर घर लौटने पर वनभुजनी पूजा की रीति पूरी मानी जाएगी।

इस मौके पर बान टोला के मुखिया लालू कुजूर, समाज के पदाधिकारी शंभू टोप्पो, राजेंद्र कच्छप, सीताराम मुंडा, खुदिया कुजूर, सुखदेव मिंज, पटेल टुट्टी, कर्मा कुजूर, तेजो कच्छप, कृष्णा टोप्पो, जगरनाथ टोप्पो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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