स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन 25 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थी स्कूल जा रहे हैं, लेकिन अब भी कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाना बाकी है। समावेशी शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। उन्होंने जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचने की आवश्यकता पर बल दिया और माध्यमिक शिक्षा में अधिक निवेश की जरूरत बताते हुए इसे विकास की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया।
संजय कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर बात करते हुए कहा कि मातृभाषा में पढ़ने वाले बच्चे शैक्षणिक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने व्यावसायिक शिक्षा के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए युवाओं में उत्पादकता, नवाचार और दक्षता अत्यंत आवश्यक होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा मिशन है कि हर बच्चे को शिक्षित करें, उसे सक्षम बनाएं और नवाचार के योग्य बनाएं।
विद्यालयों के दौरे के दौरान संजय कुमार ने सभी शिक्षा अधिकारियों के साथ कक्षा में बच्चों के साथ बैठकर शिक्षण की गुणवत्ता को परखा और हिंदी की कक्षा में उन्होंने बच्चों के साथ पूरी गर्मजोशी से अध्ययन प्रक्रिया में भाग लिया। उन्होंने बच्चों से पाठ्यक्रम से संबंधित बातचीत कर उनकी शैक्षणिक स्थिति के साथ ही उनकी विचारधारा को भी समझा। उन्होंने वोकेशनल एजुकेशन लैब, आईसीटी लैब, लाइब्रेरी, हेल्थकेयर रूम सहित अन्य कक्षों का दौरा किया और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इसके बाद संजय कुमार ने सभी अधिकारियों के साथ मिड डे मील के भोजन को चखा। उन्होंने भोजन के स्वाद और गुणवत्ता की प्रशंसा की।