पंजाब के जल संकट की स्थिति बेहद गंभीर बनती जा रही है, जिसके चलते राज्य के पास अन्य राज्यों को पानी की आपूर्ति के लिए एक बूंद भी नहीं बची है। वर्तमान में पंजाब के 76.5 प्रतिशत ब्लॉकों (153 में से 117) का भूजल स्तर इतना नीचे चला गया है कि यहां से जल निकासी की दर 100 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। इसके विपरीत, हरियाणा में मात्र 61.5 प्रतिशत ब्लॉक (143 में से 88) में ही पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है। पंजाब में अधिकांश नदी स्रोत सूख चुके हैं, जिससे राज्य की सिंचाई आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पानी की और अधिक आवश्यकता महसूस हो रही है। इस पानी की कमी के मुद्दे को सीएम भगवंत मान ने रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल के सामने उठाया है।
सीएम मान का कहना है कि जबकि पंजाब में जल संकट गहरा रहा है, फिर भी यह राज्य देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल को जानकारी दी कि रावी और ब्यास नदियों के पानी का बंटवारा करते समय यमुना नदी पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण पंजाब के लिए जल बंटवारे में असमानता बनी हुई है। पंजाब ने बार-बार यमुना के जल के बंटवारे में हिस्सेदारी की मांग की है, लेकिन इसे यह कहकर नकारा किया गया कि पंजाब का कोई भूगोल यमुना बेसिन में शामिल नहीं है।
सीएम भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा को रावी और ब्यास नदियों का पानी साझा करने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि हरियाणा खुद एक बेसिन राज्य नहीं है। मान ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि हरियाणा को इन नदियों का पानी दिया जाता है, तो समानता के आधार पर पंजाब को भी यमुना का जल साझा करने का अधिकार मिलना चाहिए। पंजाब सरकार ने नहरी पानी का उपयोग सिंचाई के लिए बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पंजाब में अब सिंचाई के लिए नहरी पानी का उपयोग 21 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है।
इसके साथ ही, पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों को गेहूं-धान के खेती के चक्र से बाहर निकलकर फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित करने की बातें की हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दी जाए। इस संदर्भ में, पंजाब राष्ट्रीय खाद्य पूल में 180 लाख मीट्रिक टन चावल का योगदान देकर देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहा है।
मान ने पंजाब के किसानों को पराली जलाने और प्रदूषण फैलाने के आरोप को अनुचित करार दिया है, यह कहते हुए कि राज्य के मेहनती किसान देश की खाद्य सुरक्षा के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस आशय पर जोर दिया कि पंजाब के किसानों की मेहनत के बिना देश खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन पाता। इस प्रकार, पंजाब के जल संकट और किसानों की मेहनत के मुद्दे को लेकर सीएम भगवंत मान ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं, जिन पर गहरा ध्यान देने की आवश्यकता है।