जालंधर में ईडी की बड़ी कार्रवाई: 178.12 करोड़ की संपत्ति जब्त, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला गरमाया

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पंजाब की जालंधर एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड, बिग बॉय टॉयज और अन्य कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पीएमएलए 2002 के अंतर्गत इन जांचों के दौरान, 6 अचल संपत्तियों, 73 बैंक खातों में 178.12 करोड़ रुपए का बैंक बैलेंस और 26 लक्जरी वाहनों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य उन कंपनियों के द्वारा की गई धोखाधड़ी और अनियमितता की जांच करना है, जिसने निवेशकों को अधिक लाभ देने के लालच में फंसाया था।

इसी संदर्भ में, ईडी ने 17 से 20 जनवरी के बीच एक ऑपरेशन चलाकर मंडेशी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, प्लैंकडॉट प्राइवेट लिमिटेड, बाइटकैनवास एलएलपी, स्काईवर्स, स्काईलिंक नेटवर्क और अन्य संबंधित संस्थाओं के दफ्तरों में छापे मारकर महत्वपूर्ण जानकारी और सामग्री जब्त की। ईडी ने जब्त की गई संपत्तियों में एक लैंड क्रूजर और मर्सिडीज जी-वैगन जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा, 3 लाख रुपए नकद तथा अनेक आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद की गईं।

जांच के दौरान सामने आया कि व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड ने अपनी मिली-जुली कंपनियों के माध्यम से निवेशकों को क्लाउड पार्टिकल्स बेचने का लालच दिया और इसे वापस लीज पर देने (SLB मॉडल) का प्रलोभन देकर उनसे धन की धोखाधड़ी की। हालांकि, ईडी की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन कंपनियों के पास नीति के अनुसार आवश्यक बुनियादी ढांचा नहीं था, जिससे निवेशकों के साथ धोखा हुआ।

ईडी की शिकायत पर, गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने BNS 2023 की धारा के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने निवेशकों को आश्वासन दिया था कि उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा। इसके अतिरिक्त, पता चला है कि व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों ने शेल कंपनियों के माध्यम से फंड को विभिन्न संपत्तियों में निवेश करने के लिए रूट किया था। इससे पहले, 26 नवंबर 2024 को भी इन कंपनियों के विभिन्न परिसरों पर छापे मारे गए थे।

इस सभी कार्रवाई का उद्देश्य न केवल निवेशकों के हितों की रक्षा करना है, बल्कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ कानून के दायरे में कठोर कदम उठाना है जो लोगों से गलत तरीके से धन कमाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसी घटनाएं निवेश क्षेत्र में विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए संबंधित अधिकारियों द्वारा निरंतर निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता है।