धर्मशाला, 01 नवंबर । हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन सप्तसिंधु परिसर, देहरा में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा नामित ग्रुप को-ऑर्डिनेटर प्रो. प्रल्हाद माने की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट बलबीर सिंह, शैक्षिक एवं युवा कार्यक्रम विशेषज्ञ तथा एनसीसी (आर्मी विंग) से संबद्ध अधिकारी, प्रतियोगिता में विश्लेषक के रूप में उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता के कार्यक्रम संयोजक डॉ. वरुण सैनी ने प्रतियोगिता की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जीवंत लोकतंत्र, संसदीय परंपराओं तथा युवाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
इसके उपरांत 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता के दौरान भारतीय संसद की वास्तविक कार्यप्रणाली का प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसमें वंदे मातरम्, प्रश्नकाल, शून्यकाल एवं विधायी कार्यवाही सहित संसदीय प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को सम्मिलित किया गया। युवा सांसदों की भूमिका निभाते हुए प्रतिभागियों ने समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए तथा संसदीय मर्यादाओं, तार्किक अभिव्यक्ति, नेतृत्व क्षमता एवं वाद-विवाद कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता के समापन पर विश्लेषक लेफ्टिनेंट बलबीर सिंह ने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार एवं महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। वहीं, भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा नामित ग्रुप को-ऑर्डिनेटर प्रो. प्रल्हाद माने ने विद्यार्थियों की संसदीय समझ, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की विशेष प्रशंसा की।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर छह प्रतिभागियों का चयन किया गया। इनमें पीताम्बर कुमार, अमनदीप मिश्रा, नेहा, हर्षिका शर्मा, अर्शित सूद एवं दिशा शामिल हैं। इन चयनित प्रतिभागियों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
इस प्रतियोगिता के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली की समझ विकसित करना, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संसदीय परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनमें नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन, संवाद एवं प्रभावी अभिव्यक्ति कौशल को प्रोत्साहित करना था।
