जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि हम मंजिल के बेहद करीब पहुंचकर भी कामयाबी हासिल नहीं कर पाते। कभी पढ़ाई में दूसरा स्थान मिलता है, कभी प्यार अधूरा रह जाता है और कभी करियर में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। रस्क मीडिया की वेब सीरीज ‘नाइन टू फाइव’ इसी अनुभव को एक युवा की कहानी के जरिए पेश करती है। व्योम चराया के निर्देशन में बनी यह सीरीज बताती है कि जिंदगी में हर बार पहले स्थान पर पहुंचना ही सफलता नहीं है। कभी-कभी अपनी कमियों को समझकर आगे बढ़ना भी बड़ी उपलब्धि होती है।
कहानी अनुज (प्रीत कमानी) से शुरू होती है, जिसे किवी एप नाम के एक स्टार्टअप में नौकरी के लिए इंटरव्यू देना है। इंटरव्यू के दौरान वह काफी घबराया हुआ नजर आता है। कंपनी के मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी हेड दीपक (राजेश कुमार) उसका इंटरव्यू लेते हैं और उसे नौकरी मिल जाती है। अनुज की जिंदगी में यह एक नई शुरुआत है, लेकिन उसकी एक पुरानी परेशानी अब भी उसके साथ है। उसका दोस्त सूजल उसे ‘ऑलमोस्ट कुमार’ कहता है, क्योंकि वह हर बार सफलता के करीब पहुंचकर भी थोड़ा पीछे रह जाता है।
नई नौकरी मिलने की खुशी के बीच उसे पता चलता है कि मकान मालिक ने फ्लैट खाली करने के लिए कह दिया है। ऑफिस में उसकी मुलाकात यशस्विनी उर्फ यश (भाग्यश्री लिमये) से होती है, जो अपने काम में माहिर और आत्मविश्वासी है। दूसरी ओर, अनुज नई नौकरी में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। वह बार-बार अपनी जिंदगी की अधूरी कामयाबियों से निराश हो जाता है। दीपक उसे समझाते हैं कि ‘ऑलमोस्ट’ होना भी इस बात का संकेत है कि वह मंजिल के करीब है। उनका संवाद ‘मेक द मोस्ट आउट ऑफ ऑलमोस्ट’ अनुज को अपनी सोच बदलने की प्रेरणा देता है। इसी बीच उसकी जिंदगी में दोस्ती और प्यार के नए अनुभव भी जुड़ते हैं। लेकिन क्या अनुज इस बार अपनी परिस्थितियों को बदलकर कामयाबी हासिल कर पाएगा? यही सवाल कहानी को आगे बढ़ाता है।
प्रीत कमानी सीरीज के सबसे मजबूत पक्ष हैं। अनुज के किरदार में वह एक ऐसे युवा की बेचैनी, असुरक्षा और महत्वाकांक्षा को सहजता से पेश करते हैं, जो लगातार खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है। उनका अभिनय स्वाभाविक लगता है और किरदार की परेशानियां दर्शकों से जुड़ाव पैदा करती हैं। राजेश कुमार दीपक के किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। उनकी सहज संवाद अदायगी और हास्य से भरपूर अंदाज कहानी को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं। वहीं, अनुज को समझाने वाले दृश्यों में उनका अभिनय सकारात्मक संदेश को मजबूती देता है। भाग्यश्री लिमये यश के किरदार में आत्मविश्वास और सहजता के साथ नजर आती हैं। उनकी संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाएं किरदार को प्रभावी बनाती हैं। तान्या शर्मा और अन्य सहायक कलाकार भी अपनी भूमिकाओं के जरिए कहानी को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं।
सिद्धार्थ तिवारी और व्योम चराया की लेखनी की खासियत ‘ऑलमोस्ट कुमार’ का विचार है। यह एक साधारण-सी अवधारणा है, लेकिन इसके जरिए बार-बार सफलता के करीब पहुंचकर पीछे रह जाने की निराशा को दिलचस्प अंदाज में दिखाया गया है। कहानी अनुज के पेशेवर जीवन के साथ उसके निजी रिश्तों को भी जोड़ती है, जिससे उसका संघर्ष केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता। निर्देशक व्योम चराया ने कहानी को सहज और मनोरंजक अंदाज में पेश किया है। ऑफिस की चुनौतियां, हल्के-फुल्के दृश्य और भावनात्मक प्रसंग सीरीज को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ते हैं। इसका मुख्य किरदार किसी असाधारण नायक की तरह नहीं, बल्कि एक आम युवा की तरह सामने आता है। यही बात इसे वास्तविकता के करीब लाती है। हालांकि, कहानी में करियर, दोस्ती और प्रेम से जुड़े प्रसंगों को और कसाव के साथ पेश किया जा सकता था, लेकिन इसका मूल विचार और प्रभावशाली संवाद दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं।
‘नाइन टू फाइव’ एक ऐसे युवा की कहानी है, जो हर बार सफलता के करीब पहुंचकर भी खुद को अधूरा महसूस करता है। प्रीत कमानी का सहज अभिनय, राजेश कुमार के दिलचस्प संवाद और भाग्यश्री लिमये की प्रभावशाली मौजूदगी सीरीज को देखने लायक बनाते हैं। इसका संदेश सरल है, कामयाबी का मतलब हमेशा पहला स्थान हासिल करना नहीं होता। जरूरी है कि इंसान अपनी गलतियों से सीखे, खुद पर भरोसा रखे और कोशिश करना न छोड़े। करियर में आगे बढ़ने की चाह, असफलता का डर और रिश्तों को संभालने की चुनौती किसी एक उम्र तक सीमित नहीं हैं। यही वजह है कि सीरीज का विषय व्यापक दर्शक वर्ग से जुड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ‘नाइन टू फाइव’ रोजमर्रा की जिंदगी के संघर्षों और उम्मीदों को हल्के-फुल्के मनोरंजन के साथ पेश करती है। अगर आप युवाओं के करियर, रिश्तों और आत्मविश्वास से जुड़ी कहानियां पसंद करते हैं, तो यह सीरीज देख सकते हैं।
