श्रीराम मर्यादा और करुणा के सागर हैं, भरत जैसा भाई दुनिया में नहीं : प्रहलाद मिश्र

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फर्रुखाबाद, 01 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर (पण्डा बाग) सत्संग भवन, रेलवे रोड में चल रहे 38वें मानस सम्मेलन में मानस विद्वानों ने भगवान श्री राम से जुड़े विभिन्न प्रसंगाें पर चर्चा की। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये।

गोस्वामी तुलसीदास के मानस प्रसंग से ‘श्री राम जीवन चरित्र’ का वर्णन करते हुए कहा कि परिवार में कैसा होना चाहिए, वर्तमान समय में समाज और परिवार को सीख लेना चाहिए। माता, पिता, गुरू का सम्मान, भाई-भाई का प्रेम, उनके स्वभाव का वर्णन करते हुए भारत की वैदिक परम्पराओं और संस्कारों की व्याख्या की। मानस में अध्ययन चिन्तन करने से श्री राम के जीवन के गुण उस व्यक्ति में स्वयं समा जाते हैं।

उन्हाेंने कहा कि श्री राम मर्यादा, अहिंसा एवं मानवता और सनातन धर्म के रक्षक थे। राम का सम्बन्ध जाति के जीवन-मरण, मुक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। उनका स्वभाव गोस्वामी तुलसी ने मानस में भगवान शंकर और माता पार्वती संवाद में, कागभुसुण्ड के द्वारा वर्णित बड़े रोचक ढंग से किया है। श्री राम प्रेम, मर्यादा, करुणा के सागर हैं, अपने भक्तों पर सदा कृपा करते रहते हैं।

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मानस प्रसंग सुनाया और कहा कि बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी मानस में लिखते हैं कि भरत का चरित्र दुनियाँ में किसी का नहीं होगा। वर्तमान समय में बात-बात में संघर्ष होते हैं वहीं पर भरत का भाई-भाई जैसा प्रेम, उनका त्याग, उनकी साधना अद्भुत है। वह सम्पत्ति का नहीं विपत्ति का बटवारा करते हैं। श्री राम वन में रहते हैं उनके आदेश से वह भी वन में रहकर राज-पाठ करते हैं, ऐसा प्रेम मानस में अनुकरणीय है। वर्तमान समय में मानस सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है।

दुर्ग-छत्तीसगढ़ से आए मानस विद्वान पं० पीलाराम ने “शास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ…”

मानस प्रसंग से कहा कि शास्त्रों का चिन्तन करना परम आवश्यक है उससे मानव जीवन में विकास होता है, परिवार, समाज, राष्ट्र का विकास होता है। 38वें मानस सम्मेलन में मानस की चौपाइयों पर विचार-चिन्तन विद्वानों द्वारा किया जा रहा है उसकी सराहना की। उन्होंने कहा वर्तमान समय में नये भारत के निर्माण में भारतीय संस्कृति में शास्त्रों का चिन्तन, अध्ययन करना अति आवश्यक है। भारतीय शास्त्र, संस्कार हमारे जीवन की मुख्य धरोहर हैं।

डॉ० रामबाबू पाठक ने मानस के सुन्दर काण्ड में माता सीता और हनुमान संवाद में उनके द्वारा आशीर्वचन तथा मानस के प्रत्येक अध्याय – बालकाण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, सुन्दर काण्ड सभी मानव जीवन में समाज, परिवार, राष्ट्र के निर्माण में प्रेरणादायक हैं।

आरती एवं प्रसाद वितरण सौम्य पाठक, विजय लक्ष्मी पाठक, अलका, माधुरी सक्सेना, मालती, शशी रस्तोगी, शुभी, रुपाली आदि महिला भक्तों सहित बृजकिशोर सिंह ‘किशोर’, डॉ० हेम सिंह, विशेष पाठक, अद्भुत, अशोक रस्तोगी, ज्योतिस्वरूप अग्निहोत्री, नरेश दुबे, विनय अवस्थी सदानंद शुक्ला विजय अवस्थी सर्वेश अवस्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन पं० रामेन्द्र नाथ मिश्र ने किया। आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का विश्राम किया गया।