उज्जैन, 14 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान से संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का भांग, चंदन, सुगंधित पुष्पों और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। आरती के दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।
बुधवार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद उनकी आज्ञा लेकर चांदी का द्वार खोला गया और गर्भगृह में भगवान महाकाल का पूजन शुरू हुआ। पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर पंचामृत पूजन किया। जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद कर्पूर आरती संपन्न हुई।
पूजन के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किया गया। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। फल, ड्रायफ्रूट और मिठाइयों का भोग अर्पित करने के बाद भस्म चढ़ाई गई। राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का दिव्य रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
परंपरा के अनुसार भस्म आरती के दौरान महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस विशेष आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंच गए थे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
भस्म आरती के दौरान नंदी हाल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। बाबा महाकाल के दर्शन और विशेष श्रृंगार को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
