नई दिल्ली, 18 अक्टूबर । अक्टूबर के महीने मे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए हैं। इस महीने एफपीआई ने अभी तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये की निकासी कर ली है। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों अपने पैसे की निकासी करने में जुटे हुए हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका भी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इन परिस्थितियों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी और दूसरे आकर्षक बाजारों का रुख कर रहे हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में हुई ताजा बिकवाली के बाद साल 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से कुल 3.12 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक सितंबर में भी भारतीय शेयर बाजार में बिकवाल की भूमिका में बने रहे थे। इस महीने के दौरान एफपीआई ने घरेलू शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। हालांकि इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की तुलना में लिवाली पर अधिक जोर दिया था। जुलाई में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 20,200 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था, जबकि अगस्त में उन्होंने 29,631 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। लेकिन सितंबर से एक बार फिर विदेशी निवेशकों का रुख बदल कर बिकवाल वाला हो गया। सितंबर में शुरू हुई बिकवाली की रफ्तार अक्टूबर में और तेज हो गई।
अगर साल 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लिवाली और बिकवाली के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अब तक भारतीय शेयर बाजार से उनकी शुद्ध निकासी 3.12 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा साल 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों की ओर से की गई कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी काफी अधिक है। इससे साफ है कि घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह इस साल लगातार दबाव में रहा है। जुलाई और अगस्त में हुई खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली का आंकड़ा काफी ऊंचा बना हुआ है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर ऊंची यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की आशंका को बढ़ा रहा है। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों में निवेश करना अधिक आकर्षक हो गया है, जिससे भारतीय शेयर बाजार जैसे उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण कम होता हुआ नजर आ रहा है।
अनिल भंसाली के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव पड़ने और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, नॉर्थ एशियन मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई तेजी भी विदेशी निवेशकों की पूंजी को भारत के बजाय उन बाजारों की ओर आकर्षित कर रही है।
हालांकि, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने बिकवाली के बजाय मामूली खरीदारी की लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे विदेशी निवेशकों के रुख में स्थायी बदलाव मानना जल्दबाजी होगी। टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अमेरिकी 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.30 प्रतिशत से अधिक के स्तर से घट कर 5.08 प्रतिशत पर आने और डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आने से विदेशी निवेशकों के रुख में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है। हालांकि, उन्होंने इस बदलाव को फिलहाल निवेश की दिशा में किसी बड़े और स्थायी बदलाव का संकेत मानने की जगह रणनीतिक कदम मानने की बात कही।
तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार विदेशी निवेशक फाइनेंशियल सर्विसेज और पेट्रोलियम से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं। दूसरी ओर, डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों, मनोरंजन, रेस्तरां और स्वास्थ्य सेवाओं सहित उपभोक्ता सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में उनकी खरीदारी बनी हुई है।
