जयपुर, 29 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती-2016 को लेकर राज्य सरकार व आरपीएससी को कहा है कि वे पदों की श्रेणीवार नए सिरे से गणना करें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 1 सितंबर, 2020 के परिणाम के तहत नियुक्त किसी भी उम्मीदवार को हटाया नहीं जाए, भले ही वह संबंधित श्रेणी में नहीं आ रहो हों। जस्टिस अशोक जैन की एकलपीठ ने श्याम सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने राज्य सरकार को अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पद सृजित करने की छूट दी है। अदालत ने कहा कि आरपीएससी 5 अक्टूबर, 2016 के विज्ञापन व शुद्धि पत्रों के आधार पर पचास फीसदी आरक्षण की सीमा और नियमों के तहत 90 दिन में पदों की गणना कर इसकी जानकारी सार्वजनिक करे। वहीं 1 सितंबर, 2020 के परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की स्थिति संशोधित मेरिट के अनुसार तय की जाए। अदालत ने पूरी प्रक्रिया 180 दिन में करने को कहा है।
प्रकरण से जुडे वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने बताया कि आरपीएससी ने 5 अक्टूबर 2016 को भर्ती विज्ञापन जारी किया था और बाद में 5 दिसंबर 2018 व 23 अगस्त 2019 को इसमें संशोधन किया। इसमें गैर-अनुसूचित क्षेत्र के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए केवल 142 पद रखे। जिससे अनारक्षित श्रेणी का अनुपात 50 फीसदी से बहुत ही कम रह गया। विज्ञापनों में बैकलॉग रिक्तियों का स्पष्ट आधार नहीं था और ओबीसी रिक्तियों को भी बिना उचित कानूनी प्रावधान के कैरी-फॉरवर्ड किया गया। इसे चुनौती देते हुए कहा कि भर्ती में आरक्षण लागू करते समय आरक्षित श्रेणियों के लिए निर्धारित पदों की कुल संख्या 50 प्रतिशत की सामान्य सीमा से ज्यादा नहीं हो सकती।
