दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने वीर विठ्ठलभाई पटेल स्मरणांजलि अंक का किया विमोचन

Share

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर । दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को वीर विठ्ठलभाई पटेल की 93वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान चेतना’ के विशेष स्मृति अंक ‘वीर विठ्ठलभाई पटेल स्मरणांजलि अंक’ का विमोचन किया। वीर विठ्ठलभाई पटेल केंद्रीय विधान सभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष रहे। ऐतिहासिक पुराने सचिवालय में आयोजित इस स्मृति कार्यक्रम के दौरान उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की गई। इस अवसर पर उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी, विशिष्ट अतिथि तथा विधानसभा के युवा संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत आए स्कूली विद्यार्थी उपस्थित रहे।

विजेंद्र गुप्ता ने यहां संबोधित करते हुए कहा कि भारत की संसदीय स्वतंत्रता का उद्घोष, देश की आजादी से बहुत पहले ही हो चुका था। वीर विठ्ठलभाई पटेल ने यह सिद्ध किया कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भी विधायिका के अधिकारों को सरकार की इच्छा के अधीन नहीं किया जा सकता और सदन के पीठासीन पद की गरिमा को राजनीतिक दबाव से परे रखा जाना चाहिए। वीर विठ्ठलभाई पटेल को भारत की संसदीय परंपराओं के प्रमुख शिल्पकारों में से एक बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि उनके निर्भीक नेतृत्व ने निष्पक्षता, प्रक्रियागत अनुशासन और संस्थागत स्वतंत्रता की ऐसी स्थायी परंपराएं स्थापित कीं, जो आज भी लोकतांत्रिक विधायिकाओं का मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं पर पटेल की गहरी पकड़ ने ब्रिटिश प्रशासन को विधायिका के समक्ष जवाब देने के लिए बाध्य किया और इस सिद्धांत को मजबूत किया कि सरकारें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह होती हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने वीर विठ्ठलभाई पटेल के असाधारण सार्वजनिक जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि बॉम्बे नगर निगम के महापौर से लेकर केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष तक की उनकी यात्रा औपनिवेशिक भारत में लोकतांत्रिक चेतना के उदय को प्रतिबिंबित करती है। 27 सितंबर 1873 को जन्मे पटेल का 22 अक्टूबर 1933 को जिनेवा में निधन हुआ। वे अपने पीछे जनसेवा, संवैधानिक निष्ठा और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रति समर्पण की अमिट विरासत छोड़ गए।

वीर विठ्ठलभाई पटेल और विधानसभा भवन के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वर्ष 1912 में निर्मित पुराना सचिवालय भारत की प्रारंभिक केंद्रीय विधायिका का केंद्र रहा था। उन्होंने स्मरण कराया कि पटेल वर्ष 1918 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में शामिल हुए, वर्ष 1924 और पुनः वर्ष 1926 में केंद्रीय विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए तथा वर्ष 1925 से 1930 तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। विशेष बात यह है कि जिस भवन में आज दिल्ली विधानसभा संचालित होती है, उसी भवन में उन्होंने अध्यक्ष के रूप में अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस ऐतिहासिक सदन ने भारत के संसदीय विकास के उस निर्णायक दौर को देखा, जब भारतीय प्रतिनिधियों ने संवैधानिक बहस और विधायी कार्यवाही के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती दी। उन्होंने आगे कहा कि पटेल के कार्यकाल में स्थापित पीठासीन पद की स्वतंत्रता, विचारपूर्ण विमर्श और प्रक्रियागत अनुशासन के सिद्धांत आज भी संस्थागत जवाबदेही और जनविश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।

इस अवसर ने युवा पीढ़ी को भारत की लोकतांत्रिक विरासत से परिचित कराने के लिए विधानसभा द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया। ‘विधान चेतना’ के विशेष अंक का विमोचन विधानसभा के युवा संपर्क कार्यक्रम के अंतर्गत भ्रमण पर आए स्कूली विद्यार्थियों की उपस्थिति में किया गया। यह आयोजन भारत के संसदीय अतीत को उसके लोकतांत्रिक भविष्य से जोड़ने का प्रतीक बना।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ‘विधान चेतना’ का यह स्मृति अंक युवा पीढ़ी को वीर विठ्ठलभाई पटेल के जीवन और योगदान से परिचित कराने में एक महत्वपूर्ण संसाधन सिद्ध होगा। पिछले वर्ष विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक ‘शताब्दी यात्रा: वीर विठ्ठलभाई पटेल’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोहराया कि दिल्ली विधानसभा भारत के अग्रणी संसदीय पुरोधाओं में से एक की विरासत को संरक्षित करने और उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।