रांची के बोड़ेया गांव में धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का ग्राम सभा ने लिया निर्णय

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रांची, 27 अक्टूबर । झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में धार्मिक प्रचार और मतांतरण से जुड़ी गतिविधियों को लेकर ग्राम सभाओं के स्तर पर फैसले लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को रांची जिले के बोड़ेया गांव की ग्राम सभा ने ईसाई धर्म प्रचारकों, पादरियों और पास्टरों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया। ग्राम सभा ने अपने फैसले की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए बोड़ेया चौक पर एक बोर्ड भी लगाया है।

ग्राम प्रधान अनिल उरांव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने बीमारी ठीक करने के नाम पर आयोजित होने वाली चंगाई प्रार्थना सभाओं और प्रार्थना महोत्सव जैसे कार्यक्रमों पर रोक लगाने का फैसला किया। बैठक में धार्मिक प्रचार और मतांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा की गई।

गांव के मुखिया सोमा उरांव ने बताया कि बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा ने गांव में धर्म प्रचार से जुड़ी गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से पादरियों, पास्टरों और अन्य ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस संबंध में गांव के प्रमुख चौक पर सूचना बोर्ड लगाकर निर्णय सार्वजनिक किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इसी महीने रांची जिले के इटकी प्रखंड अंतर्गत हरमू सालोटोली गांव में भी ग्राम सभा के स्तर पर ऐसा ही निर्णय लिया गया था। वहां ग्रामीणों ने बोर्ड लगाकर पादरियों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की सूचना दी थी।

बोड़ेया ग्राम सभा के इस निर्णय के बाद आदिवासी क्षेत्रों में धार्मिक प्रचार, मतांतरण और ग्राम सभा के अधिकारों से जुड़े सवाल एक बार फिर सामने आए हैं। हालांकि, ग्राम सभा के इस फैसले की कानूनी वैधता और इसे लागू करने के संबंध में जिला प्रशासन का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और ग्राम सभा के अधिकारों के संदर्भ में इस निर्णय की स्थिति भी स्पष्ट होना बाकी है।

बैठक में जिला परिषद सदस्य किरण देवी, वार्ड सदस्य कैलाश मंडा और जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश सदस्य सनी उरांव सहित कई जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

इसके अलावा झरी उरांव, राजन उरांव, अरविंद साहू, फूलचंद तिर्की, आदित्य महतो, संतु कुमार महतो, प्रदीप टोप्पो, परना उरांव, बालेश्वर पाहन, प्रदीप पाहन, मालती देवी, सुनीता देवी, बासो देवी, बीरन देवी, प्रोफेसर गंवा तिग्गा, राजू उरांव और रामधन उरांव सहित अन्य ग्रामीणों ने बैठक में भाग लिया।———