रांची, 05 अक्टूबर । झारखंड उच्च न्यायालय ने अरगोड़ा चौक स्थित लेक गार्डन मैरिज हॉल को सील करने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया कि पहले मैरिज हॉल संचालिका का पक्ष सुना जाए। मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शादाब बिन हक ने पक्ष रखा।
दरअसल, मैरिज हॉल की संचालिका श्रेया प्रसाद ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी है। रांची नगर निगम ने लेक गार्डन मैरिज हॉल को आवासीय क्षेत्र में संचालित बताते हुए इसके संचालन को नियम विरुद्ध बताया था। निगम ने सात दिनों के भीतर मैरिज हॉल में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर मैरिज हॉल को सील करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
प्रार्थी की ओर से न्यायालय में कहा गया कि नगर निगम बिल्डिंग बायलॉज-2016 की कंडिका 22 के तहत आवासीय क्षेत्र में मैरिज हॉल संचालित करने का प्रावधान है। साथ ही रांची नगर निगम ने ही मैरिज हॉल के लिए ट्रेड लाइसेंस सेक्शन 455 के तहत लाइसेंस जारी किया है और कमर्शियल होल्डिंग टैक्स भी वसूल रहा है।
प्रार्थी ने यह भी दलील दी कि मैरिज हॉल को सील करने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया और उनका पक्ष सुने बिना ही सील करने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया। इसे उन्होंने अनुचित बताया।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि रांची नगर निगम प्रार्थी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दे। अदालत के निर्देश के अनुसार, निगम का अंतिम आदेश आने तक मैरिज हॉल को सील करने की कार्रवाई पर रोक जारी रहेगी।
