नई दिल्ली, 01 अक्टूबर । ग्रामीण क्षेत्रों में जैव-अवक्रमणीय एवं पशु अपशिष्ट को उपयोगी बायो-सीएनजी और जैविक उर्वरकों में परिवर्तित करने के उद्देश्य से गोबरधन योजना का औपचारिक शुभारंभ गुरूवार को भारत मंडपम में किया गया। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य देश में घरेलू कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि करना है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच इस पहल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक परिवर्तनकारी और महत्वपूर्ण पहल बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह योजना न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जैव-अवक्रमणीय एवं पशु अपशिष्ट को उपयोगी बायो-सीएनजी और जैविक उर्वरकों में परिवर्तित करेगी, बल्कि भारत के नेट-ज़ीरो कार्बन लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता करेगी और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर देश की निर्भरता को कम करेगी।
बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल और संयुक्त सचिव आलोक त्रिपाठी के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान यह भी बताया गया कि प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान होगा। यह भी बताया गया कि भारत में कोई भी व्यक्ति या संस्था gobardhan.eil.co.in के माध्यम से पंजीकरण करा सकता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से विभिन्न लाभ एवं सहायता प्राप्त करने के लिए यह पंजीकरण आवश्यक होगा।
इससे पहले उद्घाटन संबोधन में भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव आलोक त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में गोबरधन पहल के अंतर्गत 217 कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र चालू हो चुके हैं। इन संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने ऐसी पहलों की सफलता में राज्य सरकारों की प्रभावी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल को प्रभावी रूप से संचालित करने और इसे गांव-गांव तक पहुंचाने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
गोबरधन योजना भारत सरकार की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य पशु गोबर, कृषि अवशेषों तथा अन्य जैविक अपशिष्टों को स्वच्छ ऊर्जा, जैसे कंप्रेस्ड बायोगैस और जैविक खाद में परिवर्तित करना है। इस पहल के कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।