कागजों पर दौड़ रहा ‘डॉग कैचर’ वाहन: टेंडर के बाद भी सैंडिस कंपाउंड और शहर के चौराहों पर आवारा कुत्तों का राज

Share

भागलपुर, 04 अक्टूबर । शहर को आवारा कुत्तों के खौफ से मुक्त करने और रेबीज मुक्त बनाने के दावों के साथ भागलपुर नगर निगम ने जिस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी, वह अब धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। नगर निगम द्वारा जयपुर की ‘संतुलन जीव कल्याण’ संस्था को 1.36 करोड़ रुपये का टेंडर सौंपकर प्रति कुत्ते के बंध्याकरण और टीकाकरण के लिए 1,610 रुपये की राशि तय की गई है।

अधिकारियों ने बड़े जोर-शोर से दावा किया था कि शहर से रोजाना 50 कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी शहर का ऐसा कोई चौक-चौराहा नहीं है, जहां इन आवारा कुत्तों का झुंड राहगीरों को डराने के लिए तैयार न बैठा हो। शहर का सबसे प्रमुख फेफड़ा और खेल परिसर, सैंडिस कंपाउंड, जहां रोजाना सुबह-शाम सैकड़ों बुजुर्ग, महिलाएं और युवा टहलने और स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं, इन दिनों आवारा कुत्तों का सबसे सुरक्षित अड्डा बन चुका है। टहलने वाले मुख्य ट्रैक पर सुबह के वक्त 10 से 15 कुत्तों का झुंड आक्रामक मुद्रा में बैठा रहता है। पिछले दिनों सैंडिस कंपाउंड में एक ही हफ्ते के भीतर चार से अधिक मॉर्निंग वॉकर्स को कुत्तों ने काटकर जख्मी कर दिया था। इसके बावजूद एजेंसी की कार्यशैली का आलम यह है कि शिकायत मिलने पर टीम जब सैंडिस कंपाउंड पहुंची, तो वहां मौजूद 50 से अधिक कुत्तों में से वह सिर्फ 2 कुत्तों को पकड़ सकी और बाकी के कुत्ते टीम के सामने से ही भाग निकले सैंडिस कंपाउंड ही नहीं, बल्कि खंजरपुर, आदमपुर, स्टेशन चौक, भीखनपुर चौक और तिलकामाझी जैसे तमाम व्यस्तम चौराहों पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। रात होते ही सड़कों पर बाइक और साइकिल सवारों के पीछे आवारा कुत्तों का पूरा झुंड दौड़ पड़ता है, जिससे रोज हादसे हो रहे हैं। जनता अब नगर निगम प्रशासन और चयनित एजेंसी से सीधे सवाल पूछ रही है कि जब प्रति कुत्ते पर 1,610 रुपये की भारी राशि खर्च की जा रही है, तो फिर धरातल पर इसका असर क्यों नहीं दिख रहा? क्या यह करोड़ों का टेंडर सिर्फ कागजी खानापूर्ति और फाइलों में आंकड़ों का पेट भरने के लिए पास किया गया है?

दिखावे की कार्रवाई क्यों? जब सैंडिस कंपाउंड जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थल पर 50 से अधिक कुत्ते मौजूद हैं, तो एजेंसी की टीम केवल 2 कुत्ते पकड़कर अपनी पीठ क्यों थपथपा रही है?

क्या संसाधनों की कमी है? करोड़ों का टेंडर लेने के बावजूद क्या एजेंसी के पास पर्याप्त डॉग-कैचर गाड़ियां, कुशल कर्मचारी और जाल (नेट) उपलब्ध नहीं हैं?

निगम की निगरानी पर सवाल: प्रतिदिन 50 कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य तय होने के बाद भी क्या नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और अधिकारी औचक निरीक्षण कर रहे हैं कि वास्तव में कितने कुत्तों को पकड़ा जा रहा है और कितनों को सिर्फ फाइलों में नसबंदी दिखाकर छोड़ दिया जा रहा है?शहरवासी अब इस रोज-रोज के खौफ और प्रशासनिक उदासीनता से तंग आ चुके हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस 1.36 करोड़ की योजना का असर सड़कों पर नहीं दिखा, तो वे नगर निगम के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर हों