नई दिल्ली, 30 अक्टूबर । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में कथित अपमानजनक बयान के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज रूबी अलका गुप्ता ने 20 नवंबर को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रविंद्र गुप्ता की ओर से वकील गगन गांधी और खरगे की ओर से प्रज्जवल सिंह ने लिखित दलीलें दाखिल दी। इसके पहले 14 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान खरगे के बयान पेन ड्राइव में न्यायालय में दाखिल किए गए। 14 अक्टूबर को याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पूरी कर ली गईं। 28 सितंबर को मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने दलीलें रखते हुए कहा था कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर कानून सम्मत फैसला किया है। इसके पहले 19 सितंबर को खरगे की ओर से इस बात से इनकार किया गया था कि वो लिखित वचन दें कि वो संघ के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक बयान नहीं देंगे।
याचिकाकर्ता रविंद्र गुप्ता ने कहा है कि वो संघ का सदस्य होने के नाते खरगे के बयानों से आहत है। उन्होंने खरगे पर एफआआईआर दर्ज करने की मांग की। इस मामले में तीस हजारी कोर्ट के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खरगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता रविंदर गुप्ता ने सेशंस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में कहा गया है कि खरगे ने 27 अप्रैल, 2023 को कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और संघ के बारे में अपमानजनक बयान दिए। याचिका में कहा गया है कि खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। इस मामले में न्यायालय ने सब्जी मंडी पुलिस थाने को एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। सब्जी मंडी थाने की पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बयान कर्नाटक में दिए गए हैं और वो सब्जी मंडी थाने के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है।
