रखते हुए नई कृषि तकनीकों तथा मशीनरी के विकास पर लगातार कार्य कर रहा है।
बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। कुलपति प्रो. कम्बोज
ने बताया कि विश्वविद्यालय ने कपास की चुगाई के लिए बड़ी मशीन विकसित की है, जो एक
एकड़ कपास की चुगाई करीब 45 मिनट में कर सकती है। अब छोटे एवं मध्यम किसानों की सुविधा
के लिए कम आकार की और सुविधाजनक मशीन तैयार करने पर भी कार्य किया जाएगा। उन्होंने
बताया कि वैज्ञानिक कपास की ऐसी उन्नत किस्में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे
हैं, जिनके पौधों की ऊंचाई सीमित हो, ताकि मशीन से चुगाई आसानी से की जा सके।
प्रो. कम्बोज ने कहा कि फसल विविधीकरण कृषि की स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने
की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसानों को धान-गेहूं के परंपरागत फसल चक्र पर निर्भरता
कम कर मक्का, दलहन, तिलहन, कपास, सब्जियों तथा अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाना चाहिए।
इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ कृषि जोखिम और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव
कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए
भविष्य में कृषि मेले के मेला ग्राउंड परिसर का विस्तार किया जाएगा।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय के 56 वर्ष के
इतिहास में इस बार कृषि मेला रबी-2026 में किसानों की अभूतपूर्व भागीदारी रही। किसानों
की भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों और
निजी क्षेत्र की कंपनियों की ओर से नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए इस बार 350 स्टॉल
पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका वैज्ञानिकों ने जवाब दिया। मंच संचालन
डॉ. कनिका रानी और श्वेता ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, अधिकारी,
कृषि विभाग के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, किसान और बड़ी संख्या में कृषि हितधारक मौजूद