गोरखपुर, 06 सितंबर । नवंबर में गोरखपुर देश के शल्य चिकित्सा विशेषज्ञों के बड़े केंद्र के रूप में दिखाई देगा। उत्तर प्रदेश शल्य चिकित्सक संघ का प्रतिष्ठित वार्षिक सम्मेलन यूपीएएसआईकॉन-2026 पहली बार गोरखपुर में आयोजित होने जा रहा है। 26 से 29 नवंबर 2026 तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में होने वाले इस चार दिवसीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ देश और विदेश से बड़ी संख्या में प्रख्यात शल्य चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक, विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे।
इस बड़े आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में संघ के अध्यक्ष द्वारा गठित वरिष्ठ विशेषज्ञों के दल ने गोरखपुर पहुंचकर व्यवस्थाओं का विस्तार से निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों ने सम्मेलन स्थल, वैज्ञानिक सत्रों, प्रत्यक्ष शल्य प्रदर्शन, कार्यशालाओं, अतिथि चिकित्सकों के ठहरने, परिवहन, स्वागत, प्रोटोकॉल तथा अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की और आयोजन को सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
निरीक्षण दल में आगरा के डॉ. अमित श्रीवास्तव, सैफई के डॉ. सोमेन्द्र नाथ सिंह, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के डॉ. अक्षय आनंद तथा संघ के तत्काल पूर्व अध्यक्ष डॉ. निखिल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक शामिल रहे। गोरखपुर की ओर से आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स गोरखपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता, आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. शिव शंकर शाही, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. शाहनवाज, डॉ. रजनीश तथा डॉ. मनीष सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान आयोजन समिति ने विशेषज्ञ दल को सम्मेलन की अब तक की तैयारियों, वैज्ञानिक कार्यक्रमों, प्रत्यक्ष शल्य प्रदर्शन, विभिन्न कार्यशालाओं, अतिथि चिकित्सकों के आवास, स्वागत, आवागमन तथा अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में इस बात पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया कि सम्मेलन के चारों दिनों में किस दिन कौन-सी शल्य विधा पर चर्चा होगी, किन आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा, वरिष्ठ विशेषज्ञों के व्याख्यान किस क्रम में होंगे तथा प्रत्यक्ष ऑपरेटिव कार्यशालाओं को किस प्रकार संचालित किया जाएगा।
चार दिवसीय सम्मेलन में आधुनिक शल्य चिकित्सा में तेजी से हो रहे बदलावों, नई तकनीकों, अत्याधुनिक उपकरणों, जटिल ऑपरेशन की आधुनिक विधियों तथा कम खर्च में अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार की संभावनाओं पर व्यापक मंथन होगा। देश-विदेश से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक अपने अनुभव साझा करेंगे और युवा चिकित्सकों एवं चिकित्सा विद्यार्थियों को नई शल्य तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझने तथा वरिष्ठ विशेषज्ञों से संवाद करने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से आने वाले चिकित्सकों के ठहरने, स्वागत, आवागमन और अन्य सुविधाओं के लिए भी विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। आयोजन समिति का प्रयास है कि सम्मेलन में आने वाले अतिथियों को चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों से परिचित कराने के साथ ही गोरखपुर की आत्मीयता, संस्कृति और आतिथ्य का भी विशिष्ट अनुभव कराया जाए।
आयोजन सचिव डॉ. शिव शंकर शाही ने रविवार काे कहा कि यूपीएएसआईकॉन-2026 का पहली बार गोरखपुर में आयोजन होना पूरे शहर और पूर्वांचल के लिए गौरव का अवसर है। देश-विदेश के प्रतिष्ठित शल्य चिकित्सकों की सहभागिता से गोरखपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा जगत में नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल चिकित्सा विज्ञान और शल्य चिकित्सा की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले अतिथियों के सामने गोरखपुर की कला, संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत, विकास यात्रा और स्थानीय उद्यमिता की झलक भी प्रस्तुत की जाएगी।
डॉ. शाही ने बताया कि एक जिला-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत गोरखपुर के विश्व प्रसिद्ध टेराकोटा, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही गीता प्रेस सहित गोरखपुर की समृद्ध साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी अतिथि चिकित्सकों को परिचित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोरखपुर आज चिकित्सा और शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, आध्यात्मिकता, आधारभूत संरचना और विकास के क्षेत्र में तेजी से अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है और यूपीएएसआईकॉन-2026 इस बदलते गोरखपुर को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन पूर्वांचल के युवा चिकित्सकों और चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्हें देश के प्रतिष्ठित शल्य विशेषज्ञों के अनुभव सुनने, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को समझने और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम बदलावों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। गोरखपुर एवं पूर्वांचल के प्रतिभाशाली चिकित्सकों के साथ जिले के विकास, शिक्षा और सामाजिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को भी इस ऐतिहासिक आयोजन में आमंत्रित करने की योजना है, ताकि चिकित्सा विज्ञान के इस बड़े मंच के माध्यम से गोरखपुर की उपलब्धियों, सामर्थ्य और संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।