प्रयागराज : पूर्व प्रधानों को प्रशासक पद से हटाने का आदेश रद्द, प्रारंभिक जांच बरकरार

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प्रयागराज, 30 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन ग्राम प्रधानों को राहत दी है, जिन्हें कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए वित्तीय अनियमितता के आरोप में पद से हटा दिया गया था। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने 12.सितंबर .2026 के आदेश का वह हिस्सा रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ताओं को प्रशासक पद से हटाया गया था।

शीला देवी , सुम्बुल जहां उर्फ सुम्बुल और सर्वेश की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। तीनों का ग्राम प्रधान के रूप में कार्यकाल समाप्त हो चुका था, लेकिन 25 मई 2026 और 29 मई 2026 के शासनादेशों के तहत वे प्रशासक के रूप में कार्य कर रही थीं। उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 95(1)(g) के तहत उनके विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गई। आरोप था कि प्रधान रहते हुए उन्होंने वित्तीय अनियमितताएं कीं। नोटिस में जवाब के लिए सात दिन का समय दिया गया था, लेकिन नोटिस देर से मिलने के कारण वास्तव में केवल चार दिन ही बचे। याचिकाकर्ताओं ने जवाब दाखिल नहीं किया, जिसके बाद आदेश पारित कर उनके प्रशासनिक अधिकार छीन लिए गए और एक निश्चित धनराशि की देनदारी तय कर दी गई।

याची का कहना था कि नोटिस बिना अधिकार-क्षेत्र के जारी हुआ और जांच भी संबंधित प्रावधानों के अनुसार नहीं की गई। जवाब के लिए समय बहुत कम दिया गया, और जवाब न देने मात्र के आधार पर प्राधिकारी जांच रिपोर्ट को बिना स्वतंत्र विवेक के स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 27 के तहत सरचार्ज लगाने के लिए ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया से स्वतंत्र जांच जरूरी है, और कार्यकाल पूरा हो चुका होने के कारण इस स्तर पर उन्हें प्रशासक पद से नहीं हटाया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें याचिकाकर्ताओं ने प्रशासक का पदभार संभालने के बाद कोई अनियमितता की हो। जांच की प्रकृति को देखते हुए तथा सरचार्ज की कार्यवाही अभी शुरू न होने के कारण, कोर्ट ने माना कि विवादित आदेश से केवल एक प्रारंभिक जांच हुई है, जो सरचार्ज निर्धारण की जांच शुरू करने का आधार बन सकती है।

इसी आधार पर कोर्ट ने 12.सितंबर 2026 के आदेशों को केवल उस बाद वाले हिस्से तक रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को प्रशासक पद से हटाया गया था, और प्रशासक के रूप में उनकी शक्तियां बहाल कर दीं। अन्य दलीलों पर कोर्ट ने कहा कि सरचार्ज की कार्यवाही शुरू होने पर, आवश्यकता पड़ने पर, उन पर विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही सभी याचिकाएं निस्तारित कर दी गईं।