तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराई कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की बात

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नई दिल्ली, 09 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तीन भाषा नीति पर सुनवाई करते हुए बुधवार को एक बार फिर केंद्र सरकार से कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने पर विचार करने को कहा। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 17 सितंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीन भाषा नीति के संदर्भ में अंग्रेजी की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या अंग्रेजी को मातृ भाषा के बजाय विदेशी भाषा माना जाना चाहिए। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वो आज ही राहत के मुद्दे पर अफसरों से बात करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने 27 मई को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और सीबीएसई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई की नई तीन भाषा नीति में नौंवी कक्षा से दो और भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य बनाया गया है। इन तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना जरुरी है। याचिका में कहा गया है कि अचानक कक्षा नौ के छात्रों को दो अतिरिक्त भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करना उनकी दसवीं बोर्ड की तैयारी प्रभावित कर सकता है। वे अचानक दो भाषाएं कैसे सीख जाएंगे और दसवीं में उनकी परीक्षा देंगे। इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई ने सभी हितधारकों से उचित परामर्श किए बिना ही रातों-रात बदलाव कर दिया। तीन भाषाओं में अगर कोई छात्र विदेशी भाषा यानि फ्रेंच, जर्मन या दूसरी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे तीसरी भाषा के रुप में ही इसे चुनना होगा।