फ्लैट लिस्टिंग के बाद सिंबायोटेक फार्मालैब के शेयरों में आई तेजी, मुनाफे में आईपीओ निवेशक

Share

नई दिल्ली, 01 सितंबर । फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए काम करने वाली कंपनी सिंबायोटेक फार्मालैब के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में फ्लैट एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को शुरुआती झटका दे दिया। हालांकि लिस्टिंग के बाद खरीदारी के सपोर्ट से ये शेयर मजबूत स्थिति में पहुंच गए। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 988 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 0.99 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 978.20 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग बिना किसी बदलाव के 988 रुपये के स्तर पर हुई।

लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण ये शेयर लुढ़क कर बीएसई पर 933.80 रुपये तक और एनएसई पर 934.20 रुपये के स्तर तक आ गया। हालांकि कुछ देर बाद ही खरीदारों ने लिवाली शुरू कर दी, जिससे ये शेयर सुधर कर 1,136.90 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। बाजार में लगातार जारी खरीद बिक्री के बीच दोपहर 11:45 बजे ये शेयर 1,130.30 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस तरह अभी तक के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 142.30 रुपये यानी 14.40 प्रतिशत का फायदा हो गया था।

इस कंपनी का 1,757 करोड़ रुपये का आईपीओ 24 से 27 अगस्त के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 75.08 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 181.20 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 77.56 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 13.69 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व पोर्शन 16.32 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत दो रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 1,77,86,442 शेयर जारी किए गए हैं। इनमें लगभग 150 करोड़ रुपये के 15,21,261 नए शेयर बिके हैं, जबकि लगभग 1,607 करोड़ रुपये के 1,62,65,181 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

सिंबायोटेक फार्मालैब की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत बनी रही है। कंपनी के शुद्ध लाभ में उतार चढ़ाव होता रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 100.06 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 96.79 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़ कर 109.90 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 723.33 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 755.98 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 872.26 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 247.21 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 540.92 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ घट कर 387.91 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 709.54 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 810.03 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 1,145.95 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 720.68 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 821.15 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ 1,158.64 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 177.04 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 206.11 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 321.97 करोड़ रुपये के स्तर पर था।