शिमला, 27 सितंबर । राजधानी शिमला में तीन दिन तक चले 12वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला (आईएफएफएस) का रविवार को पुरस्कार समारोह के साथ समापन हो गया। ऐतिहासिक गेयटी सांस्कृतिक परिसर में आयोजित समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और हिमाचल श्रेणियों में विजेता फिल्मकारों को पुरस्कार प्रदान किए। महोत्सव में वृत्तचित्र, लघु फिल्म, एनीमेशन, छात्र फिल्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिनेमा सहित अलग-अलग विधाओं की फिल्मों को दर्शकों के सामने रखा गया।
राज्यपाल ने पुरस्कार विजेता फिल्मकारों और महोत्सव में शामिल प्रतिभागियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों, भारतीय राज्यों और विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आए फिल्मकारों को एक मंच पर लाने वाले ऐसे आयोजन संस्कृतियों और समाजों के बीच संवाद और समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण हैं। पुरस्कार समारोह में फिल्मकारों, प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, फिल्म प्रेमियों और सिनेमा से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में फार फ्रॉम होम को सर्वश्रेष्ठ लंबी वृत्तचित्र फिल्म, द साउंड ऑफ द सोल को सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र और रिन्यूअल को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार मिला। द एवरेस्ट ड्रीम को लघु वृत्तचित्र और द मोल्ड को लघु फिल्म में विशेष जूरी पुरस्कार दिया गया। द रस्टि फिश सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म रही, जबकि मिलो को विशेष जूरी पुरस्कार मिला। एआई फिल्म में को-एग्जिस्टेंस और छात्र फिल्म में इटरनल किनशिप को सर्वश्रेष्ठ चुना गया। ललाबी को छात्र फिल्म का विशेष जूरी पुरस्कार मिला।
राष्ट्रीय श्रेणी में द जेनेसिस ऑफ रसा को सर्वश्रेष्ठ लंबी वृत्तचित्र फिल्म, कोल डिगर्स ऑफ इंडिया को सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र और हलगी को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार मिला। न्यिंगमा… थ्रू हर आइज़ और एन ऑयस्टर लाइफ को लघु फिल्म में विशेष जूरी पुरस्कार प्रदान किए गए। हिमाचल श्रेणी में तेनफा को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म और चुपी रोह को विशेष जूरी पुरस्कार मिला।
महोत्सव के अंतिम दिन तीन स्क्रीनिंग सत्रों में फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। सुबह फार फ्रॉम होम और द जेनेसिस ऑफ रसा दिखाई गईं। दोपहर में रिन्यूअल, द मोल्ड, द रस्टि फिश, मिलो, हलगी और तेनफा जैसी फिल्में प्रदर्शित हुईं। शाम के सत्र में एआई, छात्र, वृत्तचित्र और क्षेत्रीय सिनेमा की फिल्में दिखाई गईं। महोत्सव के दौरान मास्टरक्लास, विशेष संवाद सत्र और इंटरैक्टिव कार्यक्रम भी हुए। इसकी ‘सिनेमा बिहाइंड द बार्स’ पहल के तहत जेलों में बंद कैदियों के लिए भी चयनित फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।