जयपुर, 14 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने विभागीय मापदंड से कम परीक्षा परिणाम देने पर वरिष्ठ अध्यापक के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को गलत मानते हुए रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को समस्त परिलाभ देने के लिए कहा है। जस्टिस गणेश राम मीणा ने यह आदेश करौली जिले के जटवाडी उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक महेश शर्मा की याचिका पर दिए।
अदालत ने कहा कि केवल कम परीक्षा परिणाम के आधार पर शिक्षक को दंडित नहीं किया जा सकता। याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता साल 2018 से साल 2020 तक करौली जिले में लखरूकी के स्कूल में अंग्रेजी विषय का वरिष्ठ अध्यापक था। इस साल 10 वीं कक्षा का अंग्रेजी विषय का परीक्षा परिणाम विभागीय मापदंड से कम आया। जिस पर माध्यमिक शिक्षा संयुक्त निदेशक ने उसे चार्जशीट दी और जुलाई 2021 में उसे परिनिंदा का दंड दिया। इसकी खिलाफ पेश अपील पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने भी दंड को बरकरार रखा। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि पूर्व के सालों में उसके स्कूल का परिणाम सदैव उत्कृष्ट रहा है। केवल एक साल कम परीक्षा परिणाम आने पर उसे दंडित नहीं कर सकते। वहीं उस साल कोविड के चलते लॉक डाउन भी लग गया था। हर छात्र का पढऩे का स्तर एक जैसा नहीं होता है। उसे कम परिणाम के लिए दोषी करार देकर दंडित करना गलत है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के दंडादेश को रद्द कर दिया है।