केंद्रीय मंत्रियों ने याद की 1947 के विभाजन की त्रासदी, एकता और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

Share

नई दिल्ली, 14 अगस्त । विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 1947 में देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापन और हिंसा की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय गृह और सहकारितामंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह एवं केेंद्रीय मंत्रियों के साथ राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने विभाजन की त्रासदी को भारतीय इतिहास का दर्दनाक अध्याय बताते हुए उससे सीख लेकर राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का आह्वान किया।

केंद्रीय गृह और सहकारितामंत्री अमित शाह ने कहा कि 14 अगस्त 1947 इतिहास के उस क्रूरतम अध्याय का साक्षी है, जिसमें लाखों लोगों को जान गंवानी पड़ी और करोड़ों लोगों को घर, संपत्ति और अपनों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने विभाजन के लिए तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस दंश को इतिहास कभी नहीं भुला पाएगा। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के माध्यम से इस त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुंचा रही है, ताकि देश को तोड़ने वाली ताकतें सफल न हों और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प मजबूत हो।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस लाखों परिवारों के दुःख, विस्थापन और अनिश्चितता की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस उन लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य को भी स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने अपना घर-परिवार और संपत्ति खोने के बावजूद जीवन को दोबारा संवारने का संकल्प लिया।

कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1947 के विभाजन को दुनिया के इतिहास का बर्बरता और विभीषिका से भरा काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा और अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई। चौहान ने देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्गमंत्री नितिन गडकरी ने धर्म के आधार पर हुए विभाजन को भारतीय इतिहास का अमानवीय और काला अध्याय बताया। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश इस त्रासदी को कभी नहीं भूलेगा।

केंद्रीयमंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विभाजन के दौरान अनगिनत लोगों को विस्थापन और पीड़ा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आकांक्षाओं और संकीर्ण विचारधाराओं के कारण हुए विभाजन ने रक्तपात, नफरत और विस्थापन के जरिए समाज को गहरी चोट पहुंचाई।

केंद्रीयमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विभाजन में घर, जड़ें और अपनों को खोने वाले नागरिकों के साहस और संघर्ष को नमन किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की नीतिगत भूलों और सत्ता की राजनीति का खामियाजा करोड़ों लोगों को नरसंहार, विस्थापन और अपनों से बिछड़ने के रूप में भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह स्मृति दिवस राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 में केवल सीमाओं का विभाजन नहीं हुआ था, बल्कि असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का भी बिखराव हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें उस पीड़ा से सीख लेने और राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश देता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभाजन पीड़ित लाखों निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 को केवल देश की सीमाएं नहीं बदली थीं, बल्कि लोगों की जन्मभूमि, घर और अपने भी उनसे बिछड़ गए थे। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों के संघर्ष और देश के पुनर्निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी ने असंख्य परिवारों को अपनों से अलग कर दिया और लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, आजीविका और संपत्ति छोड़ने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि यह दर्द आज भी सामूहिक स्मृति में जीवित है और हमें मानवता, एकता तथा भाईचारे के महत्व का स्मरण कराता है।