उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती में पहुंचे कुमार विश्वास

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उज्जैन, 16 अगस्त । श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के पावन अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के प्रसिद्ध कवि एवं वक्ता कुमार विश्वास ने बाबा महाकाल की प्रात:कालीन भस्म आरती में शामिल होकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। भगवा चोला पहने कुमार विश्वास करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती के दिव्य दर्शन करते रहे। इस दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा।

कुमार विश्वास का श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक एसएन सोनी ने उनका स्वागत किया। भस्म आरती के बाद मंदिर समिति ने उनका सत्कार भी किया । दर्शन के बाद मीडिया से कुमार विश्वास ने कहा कि “यह महज संयोग नहीं है। बाबा महाकाल की कृपा है कि हर श्रावण में किसी न किसी बहाने मेरी हाजिरी लग जाती है।” उन्होंने कहा कि श्रावण हिंदू परंपरा के सबसे पवित्र महीनों में से एक है और ऐसे पावन समय में बाबा महाकाल के दर्शन होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

कुमार विश्वास ने स्वतंत्रता दिवस की भी बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता का 80वां चरण पूरा हुआ है। भारत माता अपने पुर्न वैभव को प्राप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल के चरणों में उन्होंने कृतज्ञता, धन्यवाद और प्रार्थना अर्पित की है। दर्शन के बाद मन में गहरी शांति का अनुभव हुआ। कुमार विश्वास ने कहा कि श्रावण के पवित्र माह में महाकाल के दर्शन होना उनके लिए संचित पुण्य कर्मों का प्रतिफल है।

युवाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमार विश्वास ने कहा कि युवा ही भारत का भविष्य है और भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपनी चेतना और सांस्कृतिक पहचान को लेकर पहले से अधिक सजग है। उन्होंने कहा कि युवाओं में भारतीय दर्शन और संस्कृति के प्रति बोध जागृत हुआ है। यही वजह है कि नववर्ष, विभिन्न उत्सवों और पर्वों के अवसर पर युवा देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की ओर बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव भारत की सांस्कृतिक चेतना के जागरण का संकेत है।

इधर, रविवार को श्रावण शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर महाकाल मंदिर में भस्म आरती की शुरुआत तड़के हुई। सुबह करीब 3 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया। पूजन के बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और आभूषणों से आकर्षक शृंगार किया गया। प्रथम घंटाल के बाद हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच कपूर आरती संपन्न हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंंगार किया गया। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। मोगरे और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बनी मालाओं से भगवान का अलंकरण किया गया। इसके साथ फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। रविवार की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से आशीर्वाद मांगा। भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान रहा।