बलिया में कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट बिजनेस की जांच करें डीजीपी : हाईकोर्ट - सरस जनवाद

बलिया में कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट बिजनेस की जांच करें डीजीपी : हाईकोर्ट

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प्रयागराज, 30 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी के डीजीपी को बलिया के पुलिस कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट बिज़नेस की जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह देखते हुए कि पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं, कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मी “राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय लगातार कमर्शियल गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं”।

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने प्रदेश के डीजीपी और उत्तर प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को रसड़ा पुलिस स्टेशन (बलिया जिले में) के सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है।

डीजीपी को निर्देश दिया गया कि वह 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश याचिकाकर्ता (हरेंद्र यादव) के ट्रक को असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर , बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित की गईं। ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई थी, जो याचिकाकर्ता और प्रतिवादी (संतोष कुमार – रसड़ा पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल) के बीच मालिकाना हक के विवाद से संबंधित है।

सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने कॉन्स्टेबल से बात की, जिसने बताया कि उसने अपने जीपीएफ अकाउंट से पैसे निकाले और अपने भाई के नाम पर याचिकाकर्ता के साथ बिज़नेस शुरू किया। एक ट्रक खरीदा गया और उसे याचिकाकर्ता द्वारा चलाया जाता था। कोर्ट ने पाया कि एआरटीओ ने मालिकाना हक के विवाद के संबंध में दरोगा शिव मूर्ति तिवारी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर ही वाहन को ब्लैकलिस्ट किया। सिंगल जज ने यह भी गौर किया कि बलिया के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने अपने हलफनामे में कहीं भी यह नहीं बताया कि पुलिस स्टेशन में तैनात रहते हुए ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने के लिए कॉन्स्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।

हालात पर हैरानी जताते हुए कोर्ट ने कहा: “यह कोर्ट हैरान है कि पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय बिज़नेस गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रखी जा सकती, क्योंकि पुलिस स्टेशन बिज़नेस की जगह बन गए हैं”। कोर्ट ने आगे कहा कि रसड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और बलिया के पुलिस सुपरिटेंडेंट ने कॉन्स्टेबल के पक्ष में एआरटीओ, बलिया को रिपोर्ट सौंपकर उसे “बचाया” था। एआरटीओ ने उस गाड़ी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसके ट्रांसफर पर रोक लगाई थी।

इस स्थिति को देखते हुए बेंच ने कहा कि संबंधित पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों में शामिल लगता है, जैसा कि अलग-अलग अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामे और उसमें कही गई बातों से साफ था। इसके अनुसार, कोर्ट ने डीजीपी को रसड़ा पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर हो रही कमर्शियल गतिविधियों की जांच करने और वहां तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।