जगदलपुर, 04 जुलाई । शिक्षक की कमी को लेकर संकुल देवड़ा के बड़े अलनार प्राथमिक स्कूल में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ताले का मामला फिलहाल सुलझ गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक माह के भीतर स्कूल में तीन शिक्षकों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद आज शनिवार काे ग्रामीणों ने स्कूल की चाबी बीईओ को सौंप दी। आज से स्कूल का नियमित संचालन शुरू हो गया ।
बीईओ भारती देवांगन ने बताया कि फिलहाल व्यवस्था बनाए रखने के लिए पास के मिडिल स्कूल से एक शिक्षक को प्राथमिक स्कूल में अटैच किया गया है। ग्रामीणों का कहना था कि 91 बच्चों वाले स्कूल में केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संभव नहीं है। शिक्षक को पढ़ाई के साथ प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया था। शिक्षा विभाग के आश्वासन के बाद विवाद तो शांत हो गया, लेकिन अब जिले के अन्य एकल शिक्षक वाले स्कूलों को लेकर विभाग की चिंता बढ़ गई है। जिले में कई ऐसे प्राथमिक स्कूल हैं, जहां छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद केवल एक शिक्षक पदस्थ है। इनमें बस्तर ब्लॉक के अमड़ागुड़ा प्राथमिक स्कूल में 78 और जगदलपुर के उलनार प्राथमिक स्कूल में 75 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
उल्लेखनीय है कि बस्तर जिले में कुल 1513 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 298 स्कूल ऐसे हैं, जो सालों से सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन 298 स्कूलों में पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है। एक ही शिक्षक को पांच अलग-अलग कक्षाएं एक साथ संभालनी पड़ती हैं। इसके अलावा स्कूल के प्रशासनिक काम, बच्चों का नामांकन, शाला प्रबंधन, मध्याह्न भोजन की निगरानी और विभाग की अन्य कागजी जिम्मेदारियां भी उसी शिक्षक को निभानी पड़ती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों के भाषा, गणित और सामान्य ज्ञान की नींव बनती है। जब एक शिक्षक पांच कक्षाएं एक साथ देखेगा, तो इससे बच्चों की सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा।
बस्तर जिले के डीईओ बीआर बघेल ने बताया कि शिक्षकों की भर्ती सीधे शासन स्तर से होती है। जैसे ही राज्य शासन नई वैकेंसी निकालेगा और नियुक्तियां होंगी, जिले में शिक्षकों की कमी दूर कर ली जाएगी। फिलहाल हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यवस्था के लिए अतिथि शिक्षकों का प्रावधान है। प्राथमिक स्तर पर शासन के निर्देशों के तहत ही काम किया जा रहा है। जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और शिक्षक कम है, वहां की सूची तैयार कर शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका है।