उच्च न्यायालय ने सड़क हादसे में मृत चालक के परिजनों का मुआवजा तीन गुना से अधिक बढ़ाया - सरस जनवाद

उच्च न्यायालय ने सड़क हादसे में मृत चालक के परिजनों का मुआवजा तीन गुना से अधिक बढ़ाया

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रांची, 28 जुलाई । झारखंड उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले चालक के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), तेनुघाट द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि में करीब तीन गुना वृद्धि की है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अदालत ने दावा स्वीकार करते हुए मुआवजा 1.87 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये कर दिया।

मामले को लेकर मृतक चालक बिजली रविदास की पत्नी वीणा देवी और उनके बच्चों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। अपीलकर्ता की ओर से हर्ष चंद्र एवं अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा। अदालत ने पाया कि अधिकरण ने मृतक की वार्षिक आय केवल 15,000 रुपये मानी थी, जबकि दावा किया गया था कि वह चालक के रूप में 4,000 रुपये प्रतिमाह कमाता था। हालांकि इस आय का कोई दस्तावेजी प्रमाण या नियोक्ता की गवाही उपलब्ध नहीं थी, फिर भी हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दस्तावेजों के अभाव में दावा पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह मानते हुए कि मृतक पेशे से चालक था, उसकी आय 2,000 रुपये प्रतिमाह (24,000 रुपये वार्षिक) निर्धारित की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों के अनुसार 40 प्रतिशत भविष्यगत आय जोड़ी गई और व्यक्तिगत खर्च की कटौती और 17 के मल्टीप्लायर को लागू करते हुए आश्रितों की आय हानि 4,35,200 रुपये आंकी गई। इसके अतिरिक्त अदालत ने 15,000 रुपये संपत्ति हानि 15,000 रुपये अंतिम संस्कार खर्च और तीनों दावेदारों के लिए 40-40 हजार रुपये (कुल 1.20 लाख रुपये) कंसोर्टियम के रूप में प्रदान किए। इस प्रकार कुल मुआवजा 5,85,200 रुपये निर्धारित किया गया।

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि इस राशि पर दावा याचिका दायर करने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक बीमित था और बीमा कंपनी ने अधिकरण द्वारा उस पर डाली गई देयता को चुनौती नहीं दी है। इसलिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया गया कि वह बढ़ी हुई मुआवजा राशि, पहले से किए गए भुगतान को समायोजित करते हुए, छह सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में जमा करे। इसके बाद यह राशि दावेदारों के बैंक खातों में सीधे स्थानांतरित की जाए। उक्त दिशा-निर्देश देते हुए कोर्ट ने अपील निष्पादित कर दिया।