शिमला, 11 जुलाई । पिछले दो दिन से हिमाचल प्रदेश के मध्यवर्ती और पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शिमला, सिरमौर, सोलन और किन्नौर जिलों में भारी वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। पूरे प्रदेश में 200 से अधिक सड़कें बंद हैं। इससे कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
बीते 24 घंटों में सबसे अधिक 158.9 मिमी वर्षा सिरमौर के नाहन में दर्ज की गई। इसके अलावा सोलन में 80.2 मिमी, कांगड़ा के नगरोटा सूरियां में 62.5 मिमी, गुलेर में 56.3 मिमी, सिरमौर के धौलाकुआं में 55.5 मिमी, शिमला के नारकंडा में 54.5 मिमी, कुफरी में 50.8 मिमी, कुल्लू के सैंज में 48 मिमी, शिमला शहर में 37.5 मिमी और मशोबरा में 36.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने 14 जुलाई तक भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया है। शनिवार को शिमला, चम्बा, कुल्लू और सिरमौर में भारी वर्षा, जबकि मंडी, किन्नौर और कांगड़ा में मध्यम से तेज वर्षा की चेतावनी दी गई है।
किन्नौर जिले के कल्पा उपमंडल के सांगला में भारी बारिश के कारण जमीन धंसने से वैली ब्रिज शुक्रवार को हवा में लटक गया था। बीती रात पुल पूरी तरह ढह गया। पुल टूटने से क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित हुई है और प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए है।
राजधानी शिमला में भी लगातार बारिश से कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ। कसुम्पटी थाना क्षेत्र के राजहाना में पहाड़ी से भारी मात्रा में चट्टानें, पत्थर और मलबा सड़क पर आ गिरा। वहां खड़े दो वाहन मलबे में दब गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में शनिवार तड़के करीब चार बजे फिर भारी भूस्खलन हुआ। सड़क का हिस्सा धंसकर नीचे बने रिहायशी मकानों की ओर आ गया और मकानों तक जाने वाला रास्ता भी टूट गया। स्थानीय लोगों के अनुसार तीन से चार इमारतें खतरे की जद में हैं। पुलिस ने एहतियात के तौर पर लोगों को मकान खाली करने की सलाह दी है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए दूसरी जगह नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी निर्माण के दौरान पहाड़ी की खुदाई होने से ढलान कमजोर हुई और लगातार बारिश के बाद भूस्खलन हुआ। उन्होंने निर्माण कार्य रोकने और भू-वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। इसी स्थान पर जून 2025 में भी बड़ा भूस्खलन हुआ था।
लगातार बारिश का असर शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के दूरदराज क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। गानवी खड्ड का जलस्तर बढ़ने से जगोरी, क्याओ और कूट पंचायतों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। कशापाट क्षेत्र की सड़क भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। प्रशासन के पहुंचने से पहले ग्रामीण स्वयं सड़क की मरम्मत में जुट गए हैं। प्रशासन ने दिन के समय स्कूल मार्ग से वैकल्पिक सड़क पर यातायात शुरू कर दिया है।
उधर, कुल्लू जिले में पार्वती-2 पावर स्टेशन के पुलगा बांध का जलस्तर लगातार बढ़ने पर एनएचपीसी ने शनिवार शाम साढ़े छह बजे बांध से लगभग 50 क्यूमेक अतिरिक्त पानी पार्वती नदी में छोड़ने की सूचना दी है। इसके बाद नदी में कुल जल प्रवाह करीब 225 क्यूमेक रहने का अनुमान है। यदि जलाशय में पानी की आवक और बढ़ी तो अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा सकता है। लोगों, पर्यटकों और श्रमिकों से पार्वती नदी के किनारों से दूर रहने की अपील की गई है। चेतावनी के लिए सायरन बजाए जाएंगे और आसपास के क्षेत्रों में प्रचार वाहन भी तैनात किए जाएंगे।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने कहा है कि अगले कुछ दिन प्रदेश में वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। निचले क्षेत्रों में जलभराव, फिसलन के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा, यातायात प्रभावित होने और संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। लोगों से नदी-नालों के पास नहीं जाने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन व मौसम विभाग की ओर से जारी सलाह का पालन करने की अपील की गई है।