शिमला, 19 जुलाई । हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई के लिए राज्य के कई हिस्सों में बहुत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। इन दो दिनों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। 19 और 22 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट तथा 23 जुलाई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 24 और 25 जुलाई को मौसम में कुछ राहत मिलने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। लगातार सक्रिय मानसून के चलते भूस्खलन, अचानक बाढ़, नालों के उफान और सड़कें बंद होने जैसी घटनाओं का खतरा बना हुआ है। लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।
धर्मशाला में सबसे ज्यादा बारिश, शिमला में भी रातभर बरसे बादल
बीती रात प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक धर्मशाला में 82.2 मिमी वर्षा हुई। इसके अलावा कांगड़ा में 57.9 मिमी, धर्मशाला एडब्ल्यूएस में 50.0 मिमी, पांवटा साहिब में 33.0 मिमी, पालमपुर में 27.1 मिमी, भटियात में 22.2 मिमी, जोत में 20.0 मिमी, हमीरपुर में 13.5 मिमी, सुंदरनगर और मशोबरा में 9-9 मिमी, भरमौर में 8.0 मिमी, मंडी में 6.4 मिमी, देहरा गोपीपुर में 6.3 मिमी तथा शिमला में 3.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मनाली में 3.0 मिमी, धौलाकुआं में 3.0 मिमी, कुफरी में 2.5 मिमी, जुब्बड़हट्टी में 1.4 मिमी और नारकंडा में 1.5 मिमी बारिश दर्ज हुई। मौसम विभाग का कहना है कि रविवार को भी अधिकांश स्थानों पर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है और कई इलाकों में तेज वर्षा हो सकती है।
बारिश के कारण किन्नौर जिले के सांगला क्षेत्र में शनिवार देर शाम फ़्लैश फ्लड ने कोहराम मचाया। रक्छम के मस्तरंग में आईटीबीपी कैंप के पास नाले में अचानक फ्लैश फ्लड आने से सांगला-छितकुल सड़क बुरी तरह प्रभावित हो गई। तेज बहाव से आईटीबीपी कैंप की एक गुमटी को नुकसान पहुंचा और रक्छम-छितकुल मार्ग पर यातायात रोकना पड़ा। प्रशासन के अनुसार इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। सड़क से मलबा हटाने और मार्ग बहाल करने का काम जारी है तथा रविवार शाम तक यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। उधर, चम्बा जिले में लगातार बारिश के कारण पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग बत्ती हट्टी (कुमनाला) और दुर्गेठी के पास भूस्खलन और मलबा आने से बंद हो गया।