देशभर से आए किसानों , पशुपालकों ने सीखे भेड़ एवं बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीके - सरस जनवाद

देशभर से आए किसानों , पशुपालकों ने सीखे भेड़ एवं बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीके

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बीकानेर, 20 जुलाई । देश के विभिन्न राज्यों से आए 91 किसानों एवं पशुपालकों ने एसकेआरएयू में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीकों से भेड़ एवं बकरी पालन करते हुए उद्यमिता विकास के तरीके सीखे। प्रशिक्षण का सोमवार को कृषि महाविद्यालय सभागार में समापन समारोह आयोजित किया गया अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ विजय प्रकाश ने समापन समारोह में प्रतिभागियों की हौंसला अफजाई की। उन्होंने कहा कि भेड़ एवं बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समृद्धि एवं आत्मनिर्भरता का आधार हैं। राजस्थान जैसे पशुधन प्रधान राज्य में वैज्ञानिक भेड़ एवं बकरी पालन किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों एवं नवाचारों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवहारिक रूप से अपनाने का आव्हान किया।

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. शंकर लाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि सात दिनों के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक भेड़ एवं बकरी पालन के विभिन्न आयामों, जैसे उन्नत नस्ल चयन, आवास प्रबंधन, संतुलित पोषण, प्रजनन प्रबंधन, स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण, चारा उत्पादन, आर्थिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा उद्यमिता विकास से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान किया गया।

प्रतिभागियों को आधुनिक भेड़ एवं बकरी फार्मों का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्हें सफल पशुपालन मॉडल, आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों तथा उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। इससे प्रतिभागियों को अपने क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर सफल पशुधन उद्यम स्थापित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने किसानों से केवल पारंपरिक पशुपालन तक सीमित न रहकर मांस, दूध, ऊन एवं अन्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) तथा प्रभावी विपणन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

सहायक आचार्य डॉ. कुलदीप प्रकाश शिंदे ने धन्यवाद दिया। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, शोधार्थी तथा प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।