शिमला में एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के 48 मामले लंबित

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शिमला, 18 जून । शिमला जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज मामलों के निपटारे की रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। जिला प्रशासन के अनुसार वर्ष 2018 से मई 2026 तक इस कानून से जुड़े 48 मामले लंबित हैं।

इन्हीं लंबित मामलों और अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए गुरुवार को बचत भवन में जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।

बैठक में अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की स्थिति, पीड़ितों को दी जाने वाली राहत और पुनर्वास सहायता, लंबित प्रकरणों तथा विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाए और अत्याचार संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने और उनके सम्मान तथा अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। पात्र पीड़ितों को राहत और सहायता समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक में यह भी बताया गया कि अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत पीड़ितों को न्यूनतम 85 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 8.25 लाख रुपये तक की राहत राशि प्रदान करने का प्रावधान है।

उपायुक्त ने कहा कि जल्द शुरू होने वाले पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इस अधिनियम और अन्य महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी भी शामिल की जाएगी। उनका कहना था कि पंचायत प्रतिनिधि गांव स्तर पर लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर सकते हैं और प्रभावित व्यक्तियों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में सहयोगी भूमिका निभा सकते हैं।

बैठक में समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न मुद्दों पर सुझाव रखे और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के कल्याण और संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार शिमला जिले की कुल जनसंख्या 8,14,010 है, जिनमें 2,15,777 लोग अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं। यह जिले की कुल आबादी का 26.51 प्रतिशत है। जिले के 684 गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 292 गांव ऐसे हैं जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या 90 से अधिक है। ऐसे में प्रशासन का मानना है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत बनाना आवश्यक है ताकि अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय और राहत मिल सके।