भाेपाल, 15 जून । ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के अंतिम दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या, सूर्य संक्रांति और अमृत सिद्धि योग के दुर्लभ महासंयोग ने पूरे मध्य प्रदेश को आस्था और श्रद्धा के रंग में रंग दिया। उज्जैन की पावन शिप्रा से लेकर नर्मदा तट, चित्रकूट की मंदाकिनी और बांदकपुर के जागेश्वर धाम तक लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान, दान, तर्पण और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर सुबह से ही कुंभ जैसे हालात नजर आए। प्रशासन को सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम करने पड़े।
धर्माचार्यों के अनुसार वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जब सोमवती अमावस्या, अमृत सिद्धि योग, पुरुषोत्तम मास का समापन और सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश एक ही दिन हुआ। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और पितृ तर्पण कई गुना अधिक फलदायी होता है।
उज्जैन के रामघाट और सोमकुंड पर कुंभ जैसा नजारा
धर्मनगरी उज्जैन में साेमवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। घाटों पर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य किया। घाटों पर पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजन कराया गया। अधिकमास के समापन के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही।
महाकालेश्वर मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। सुबह से मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भरे रहे। ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार अमृत सिद्धि योग और सोमवती अमावस्या का यह महासंयोग अत्यंत दुर्लभ है। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
नर्मदापुरम में नर्मदा तट पर 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
नर्मदापुरम में सेठानी घाट सहित नर्मदा के प्रमुख घाटों पर सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। अब तक करीब 30 हजार से अधिक श्रद्धालु नर्मदा स्नान कर चुके थे। सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, गोंदरी घाट और पर्यटन घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद नर्मदा पूजन, दीपदान और दान-पुण्य किया। भोपाल, विदिशा, बैतूल, छिंदवाड़ा तथा महाराष्ट्र के नागपुर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। रविवार रात से ही घाटों पर भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी रात भक्ति गीतों के बीच बिताई और सुबह स्नान कर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस, होमगार्ड, राजस्व अमला और गोताखोर तैनात किए गए। घाटों पर लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों को गहरे पानी में जाने से रोका गया।
चित्रकूट में पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान, मंदाकिनी में आस्था की डुबकी
सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट में सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया। रामघाट, कामतानाथ मंदिर और पांच किलोमीटर परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान कामतानाथ की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरा चित्रकूट भगवान श्रीराम और कामतानाथ स्वामी के जयघोष से गूंजता रहा।
प्रशासन ने चार से पांच लाख श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। एडिशनल एसपी प्रेमलाल कुर्वे के नेतृत्व में पुलिस बल, 12 थाना प्रभारी, 250 से अधिक जवान, दो एसएएफ कंपनियां और एसडीईआरएफ की टीम तैनात रही। घाटों पर मोटरबोट और जीवनरक्षक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए।
बड़वानी में राजघाट के रोहिणी तीर्थ पर उमड़ा आस्था का सैलाब
बड़वानी जिले के प्रसिद्ध राजघाट स्थित रोहिणी तीर्थ पर हजारों श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही घाटों पर भक्तों की भीड़ लग गई थी। महिलाओं ने पीपल वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधा और परिवार की खुशहाली तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। घाटों पर भजनों, शंखनाद और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान किया। कई लोगों ने पितरों की शांति के लिए तर्पण भी किया। पुलिस, गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। घाटों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान व्यवस्था की गई।
दमोह के जागेश्वरधाम में एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
दमोह जिले के प्रसिद्ध जागेश्वरधाम बांदकपुर में सोमवती अमावस्या पर तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। सुबह साढ़े आठ बजे तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। मंदिर प्रबंधन ने भीड़ को देखते हुए गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रखा। श्रद्धालुओं ने बाहर से ही जल अर्पित कर भगवान जागेश्वरनाथ के दर्शन किए।
पूरे दिन में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पांच थाना क्षेत्रों का पुलिस बल, अतिरिक्त जवान और 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसी कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे।
ग्वालियर में अमृत सिद्धि योग ने बढ़ाया पर्व का महत्व
ग्वालियर में ज्योतिषाचार्यों ने इस बार की सोमवती अमावस्या को दशकों में बनने वाला दुर्लभ संयोग बताया है। पंडित दयानंद शर्मा के अनुसार अमृत सिद्धि योग, मृगशिरा नक्षत्र और पुरुषोत्तम मास के समापन का संयोग इसे विशेष बना रहा है। इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध, जप, तप और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। चावल, दूध, शक्कर और सफेद वस्तुओं का दान चंद्रमा की कृपा दिलाने वाला माना गया है। इस धार्मिक महासंयोग के बीच सोमवार दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर सूर्य ने वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश किया। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है। धर्माचार्यों के अनुसार संक्रांति काल में स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है।
क्यों खास है यह सोमवती अमावस्या?
* सोमवती अमावस्या और सोमवार का दुर्लभ संयोग
* पुरुषोत्तम (अधिक) मास का अंतिम दिन
* अमृत सिद्धि योग का निर्माण
* सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश
* पितृ तर्पण, दान और श्राद्ध के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त
* नर्मदा, शिप्रा और मंदाकिनी में स्नान का विशेष महत्व
धर्माचार्यों का मानना है कि इस महासंयोग में श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए स्नान, दान, जप, तप और तर्पण से कई जन्मों के पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण रहा कि सोमवार को मध्य प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला।
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