सामूहिक जन आंदोलन चलाने का आह्वान किया।
राज्यपाल
ने कहा कि नशा आज एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है, जो समाज, जनस्वास्थ्य, सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को
प्रभावित कर रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि नशा तस्कर स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों तक इस
बुराई को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पड़ोसी राज्यों से जुड़े होने के कारण
चंडीगढ़ भी अवैध तस्करी के खतरे के प्रति संवेदनशील है।
कटारिया
ने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने वाला हर युवा न केवल अपने परिवार के सपनों को
तोड़ता है, बल्कि देश अपनी
बहुमूल्य युवा शक्ति का एक हिस्सा भी खो देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के
खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों के भरोसे नहीं जीती जा सकती,
बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग की
भागीदारी जरूरी है।
राज्यपाल
ने नगर निगम से प्रत्येक वार्ड में जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाने, सामुदायिक केंद्रों में काउंसलिंग सत्र
आयोजित करने और स्कूलों, कॉलेजों,
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, महिला मंडलों, युवा क्लबों और स्वयंसेवी संगठनों को इस
अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में ‘नशामुक्त वार्ड समितियां’ गठित करने का प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने
कहा कि सामुदायिक केंद्रों को योग, खेल,
ध्यान, परामर्श, व्यक्तित्व विकास और कौशल संवर्धन
गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा मिल सके।
राज्यपाल ने नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए नशे की
लत से जूझ रहे युवाओं के उपचार, पुनर्वास
और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
चंडीगढ़
के महापौर सौरभ जोशी ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि नगर निगम पार्षदों, नागरिकों और सामाजिक संगठनों की
भागीदारी से वार्ड स्तर पर नशा विरोधी अभियान का नेतृत्व करेगा। नगर निगम आयुक्त
अमित कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए निगम की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर राज्यपाल
ने पार्षदों, अधिकारियों
और कर्मचारियों को नशा विरोधी शपथ दिलाई। राज्यपाल ने ‘नशा विरोधी हस्ताक्षर बोर्ड’ पर हस्ताक्षर कर नशामुक्त चंडीगढ़ के
संकल्प को मजबूत किया।