जोर पर होने के कारण खाद की मांग लगातार बढ़ रही है।
अपने पत्र में
ढिल्लों ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे के प्रति संवेदनशील है और आवश्यकता
अनुसार खाद की आपूर्ति कर रही है, लेकिन जून और
जुलाई के महीनों में पंजाब में डीएपी और यूरिया की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती
है। ऐसे में किसी भी प्रकार की कमी किसानों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकती
है। उन्होंने कहा कि खाद की कमी के कारण किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना
पड़ता है, जिससे बुआई कार्य प्रभावित होता है और
फसल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
भाजपा प्रदेश
अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि खाद की कमी का लाभ उठाकर कुछ तत्व जमाखोरी और कालाबाजारी
को बढ़ावा देते हैं, जिससे किसानों को निर्धारित एमआरपी से
अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है। उन्होंने पंजाब के लिए अतिरिक्त डीएपी कोटा
जारी करने तथा 2 से 3 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक पहले से उपलब्ध रखने की मांग
की। ढिल्लों ने यूरिया
की आपूर्ति का मासिक शेड्यूल पंजाब सरकार के साथ साझा करने, केंद्रीय मंत्रालय, इफको, एनएफएल और राज्य सरकार के बीच रियल-टाइम निगरानी तंत्र
स्थापित करने तथा खाद की अवैध ढुलाई और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि देश के अन्न भंडार में पंजाब के बड़े योगदान को देखते हुए खाद
आवंटन के मौजूदा फार्मूले की समीक्षा कर राज्य को उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार
अधिक कोटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय मंत्री जल्द आवश्यक
कदम उठाकर किसानों के हितों की रक्षा करेंगे।