जी-7 सम्मेलन में दिखी भारतीय कूटनीति, पीएम मोदी ने ब्रिटेन, यूएई, जापान, मिस्र और केन्या के नेताओं से की मुलाकात

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एवियन (फ्रांस), 16 जून । फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इन बैठकों की जानकारी साझा करते हुए विभिन्न देशों के साथ सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ हुई मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन संबंधों में पिछले एक वर्ष के दौरान आई मजबूती पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हालिया व्यापार समझौते ने आर्थिक सहयोग के नए अवसर खोले हैं। बैठक में नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), कौशल विकास, खेल तथा निवेश जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त बनाने के उपायों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति वहां की सरकार द्वारा दिखाई जा रही संवेदनशीलता और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ बातचीत में व्यापार और निवेश को प्राथमिकता देते हुए दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और मिस्र के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को विशेष बताया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

इसके अलावा केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बैठक में वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की साझा आकांक्षाओं और विकास संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और केन्या की साझेदारी आपसी विश्वास और विकास सहयोग पर आधारित है तथा दोनों देश अपने नागरिकों के कल्याण के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे।

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई इन बैठकों को भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति और प्रमुख देशों के साथ बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।