राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति व अधिकारियों के साथ की बैठक

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लखनऊ, 15 मई । प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार काे जन भवन में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतिकरण सम्पन्न हुआ।

राज्यपाल ने निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर सक्रिय रूप से कार्य किया जाए तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के ही छात्र-छात्राओं की अधिकाधिक प्रतिभागिता सुनिश्चित की जाए।

राज्यपाल ने मुक्त विश्वविद्यालय की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है, जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं अथवा नौकरी करते हुए आगे की शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने तथा रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जाने पर बल दिया। उन्होंने जीएसटी से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसी समस्याएं हैं, जिन पर विश्वविद्यालय गंभीरता से कार्य कर सकता है। प्रयागराज स्थित जेलों में महिला बंदियों की समस्याओं, बाल पालन-पोषण तथा किशोर अपराध जैसे विषयों पर शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपेक्षा की कि वह इन विषयों पर संवाद स्थापित करे तथा लोगों से फीडबैक लेकर सकारात्मक पहल विकसित करे।

राज्यपाल ने कहा कि संवाद अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय को प्रयागराज में अवस्थित विश्वविद्यालयों से समन्वय स्थापित कर विचार-विमर्श करना चाहिए तथा अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि समाज में घटित प्रेरणादायी घटनाओं, उत्कृष्ट कार्यों तथा नवाचारों पर लेखन एवं पुस्तक निर्माण किया जाना चाहिए। यदि विश्वविद्यालय अथवा किसी अध्यापक द्वारा कोई सराहनीय कार्य किया गया है, तो उसके परिणामों एवं प्रभावों का दस्तावेजीकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे विषय हैं, जिन पर विचार एवं प्रबंधन की आवश्यकता है। महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के एक साथ स्नान करने की व्यवस्था एवं प्रबंधन अपने आप में अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है। इस पर शोध एवं लेखन कार्य किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आस्था के कारण विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग भारत आए तथा अनेक विदेशी हिंदी, संस्कृत एवं भागवत का अध्ययन कर रहे हैं। इन विषयों पर भी शोध एवं लेखन कार्य किया जाना चाहिए।