जयपुर, 04 मई । सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से भर्ती रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों को कोई राहत नहीं देते हुए प्रारंभिक स्तर पर ही नोटिस जारी किए बिना उनकी एसएलपी खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती प्रक्रिया की गोपनीयता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पेपर लीक से प्रभावित भर्ती प्रक्रिया को यह अदालत मंजूरी नहीं दे सकती। जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश चयनित अभ्यर्थी पायल शर्मा व अन्य की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए दिए।
एसएलपी में हाईकोर्ट की खंडपीठ के 4 अप्रैल 2026 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें एसआई भर्ती में बडे पैमाने पर पेपर लीक व धांधली होने के आधार पर इसे रद्द ही रखा था और एकलपीठ के फैसले में दखल देने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती में बडे पैमाने पर पेपर लीक हुआ है और ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों का पृथक्करण ही एकमात्र वैधानिक उपाय होता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह संभव नहीं है। खंडपीठ ने नीट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें 44 एमबीबीएस अभ्यर्थी ही पकडे गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तब भी पूरी भर्ती को ही रद्द कर दिया था। हालांकि अदालत ने केन्द्र सरकार व पीएसयू में कार्यरत रहे और भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की छूट दी है। इन अभ्यर्थियों की ओर से कहा कि उन्होंने एसआई भर्ती में शामिल होने के लिए अपनी पूर्व की सेवाएं छोड दी थी, लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ के भर्ती रद्द करने के आदेश में उनके लिए स्पष्ट तौर पर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं। इसलिए उनके लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाए। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे इस संबंध में हाईकोर्ट के समक्ष ही पुनर्विचार याचिका दायर कर सकते हैं।
तत्कालीन चेयरमैन श्रोत्रिय को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन के संजय श्रोत्रिय के खिलाफ हाईकोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों को हटाने से मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि आप चेयरमैन थे और आपकी चेयरमैनशिप में ही सब कुछ हुआ है। यह सार्वजनिक हित से जुड़ा मामला है। इसलिए कोई भी टिप्पणी नहीं हटेगी। दरअसल, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को एसआई भर्ती रद्द करते हुए पेपर लीक में आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन और सदस्यों की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। एकलपीठ ने कहा था कि चेयरमैन ने ऐसे सदस्य को परीक्षा की जिम्मेदारी दी, जिस पर पहले ही दूसरी भर्ती के पेपर लीक में शामिल होने के आरोप थे। उसी सदस्य ने परीक्षा से 35 दिन पहले भर्ती का पेपर रद्द कर दिया। एकलपीठ की टिप्पणियों को हटाने के लिए पूर्व में खंडपीठ में अपील दायर की गई थी। जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया था।