नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा अगले हफ्ते से, भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए बुकिंग शुरू

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काठमांडू, 06 मई । नेपाल के रास्ते भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का सीजन शुरू हो गया है। आगामी सप्ताह से यात्रा शुरू करने के लिए व्यवसायी तेजी से बुकिंग ले रहे हैं।

व्यवसायियों के अनुसार अब तक लगभग 5,000 भारतीय श्रद्धालुओं ने तीर्थयात्रा के लिए ट्रैवल बुकिंग करा ली है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रसुवा के केरूंग नाका और हुम्ला के हिल्सा नाका से होकर तीर्थयात्री सड़क मार्ग से जाते हैं।

सिन्धुपाल्चोक का तातोपानी नाका फिलहाल बंद है, जबकि कुछ तीर्थयात्री ल्हासा के रास्ते हवाई मार्ग से भी मानसरोवर पहुंचते हैं। हाल ही में भारत और चीन के बीच लिपुलेक दर्रा के जरिए यात्रा खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि मौसम, भौगोलिक स्थिति, दूरी और लागत के हिसाब से अधिकतर यात्रियों का आकर्षण हिल्सा नाका की ओर देखा गया है।

इस वर्ष भारतीय तीर्थयात्री 35 टूर एंड ट्रैवल्स कंपनियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बुकिंग कर रहे हैं। व्यवसायियों के अनुसार हिल्सा मार्ग से जाने वाले तीर्थयात्री भारत के लखनऊ से होकर नेपालगंज पहुंचते हैं और फिर हुम्ला जाते हैं।

एसोसिएशन फॉर कैलाश टूर ऑपरेटर्स (ACTON) नेपाल के अध्यक्ष विमल नहर्की के अनुसार, “नेपाल का सबसे नजदीकी भारतीय हवाई अड्डा लखनऊ है। वहां से नेपालगंज की दूरी 190 किलोमीटर है, जिसे लगभग 3 घंटे में तय किया जा सकता है। नेपालगंज से विमान के जरिए सिमकोट होते हुए हिल्सा पहुंचा जाता है और वहां से लगभग 105 किलोमीटर दूर मानसरोवर तक 4 घंटे में पहुंचा जा सकता है।”

उनके अनुसार, पहले दिन पर्यटक नेपालगंज में रुकते हैं, दूसरे दिन सिमकोट और तीसरे दिन हेलिकॉप्टर से नेपाल–चीन सीमा हिल्सा पहुंचकर दार्चेन बेस कैंप में ठहरते हैं। चौथे दिन करीब 60 किलोमीटर दूर कैलाश पर्वत जाकर दर्शन करते हैं और वापस लौटते हैं।

एक अन्य पर्यटन व्यवसायी विजय सिंह के अनुसार, “जो लोग चलने में सक्षम होते हैं, वे कैलाश की 52 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं, जबकि असमर्थ यात्री दार्चेन बेस कैंप से ही दर्शन कर लौट जाते हैं। इसके बाद वे सिमकोट और फिर नेपालगंज लौटते हैं। यह पूरा रूट लगभग 7 दिनों में पूरा किया जा सकता है।”

पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार नेपाल के अन्य मार्गों से यह यात्रा करने में कम से कम 10 दिन लगते हैं।

जिला पुलिस कार्यालय हुम्ला के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष हिल्सा नाका के जरिए 6,042 लोगों ने कैलाश–मानसरोवर यात्रा की थी। चीन ने कोरोना महामारी के बाद पिछले वर्ष ही इस यात्रा को दोबारा खोला था।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 5,717 भारतीय और 325 अन्य देशों के नागरिकों ने हुम्ला मार्ग से मानसरोवर की यात्रा की, जिनमें 3,334 पुरुष और 2,708 महिलाएं शामिल थीं।