बलरामपुर, 25 अप्रैल । विश्व मलेरिया दिवस पर बलरामपुर जिले में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों से मलेरिया के मामलों में बड़ी गिरावट आई है और जिला अब मलेरिया मुक्त बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कलेक्टर राजेंद्र कटारा के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में मितानिन समन्वयकों और प्रशिक्षकों की संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी में डॉ. सिंह ने मलेरिया उन्मूलन के लिए जनभागीदारी को सबसे अहम बताते हुए कहा कि इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। वर्ष 2026 की थीम “मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रेरित—हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा” रखी गई है। बैठक में समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और रोकथाम के उपायों पर विशेष चर्चा की गई।
जिला सलाहकार दिव्य किशोर गुप्ता ने मलेरिया के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी देते हुए बताया कि यह बीमारी प्लास्मोडियम परजीवी से होती है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द और कमजोरी हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकते हैं।
जिलास्तरीय कार्यक्रम असर्फी देवी कॉलेज में आयोजित हुआ, जहां चित्रकला, निबंध लेखन और मलेरिया विषयक प्रतियोगिताएं कराई गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। वहीं जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में आमजन को मच्छरदानी उपयोग, साफ-सफाई, जल जमाव रोकने और समय पर जांच-उपचार के प्रति जागरूक किया गया। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया जांच और उपचार नि:शुल्क उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में मलेरिया नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2017 में जहां 11,008 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर मात्र 6 रह गई। सभी मामलों का समय पर उपचार कर संक्रमण के फैलाव को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया गया है। वर्तमान में जिला मलेरिया मुक्त बनने की ओर अग्रसर है।
ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए नारा लेखन, पारा बैठकें और मितानिनों के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान लगातार चलाया जा रहा है। प्रत्येक गांव के हर पारा में नारा लेखन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जागरूकता का दायरा और व्यापक हो सके।